Last updated: September 26th, 2026 at 02:12 pm

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 1994 के डबल मर्डर और डकैती के एक मामले में करीब 32 साल से फरार चल रहे 48 वर्षीय आरोपी ललित को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मामला पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाके स्थित एक आध्यात्मिक आश्रम में दो साध्वियों की हत्या और लूट से जुड़ा है। आरोपी को मंगोलपुरी फेज-2 की एक फैक्ट्री से पकड़ा गया, जहां वह कथित तौर पर पैकेजिंग मजदूर के रूप में काम कर रहा था।
पुलिस के मुताबिक, 1994 में आश्रम में दो साध्वियों की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद आश्रम से नकदी, आभूषण और अन्य कीमती सामान लूटे जाने का आरोप है। मामले की जांच शकरपुर थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर शुरू हुई थी। पुलिस ने उस समय कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन ललित गिरफ्तारी से बचता रहा।
पुलिस के अनुसार, ललित इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने एक साध्वी की हत्या में भूमिका निभाई थी और वारदात के बाद लूटे गए नकदी तथा आभूषणों में उसका हिस्सा भी था। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।
वारदात के शुरुआती दौर में पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों—सुनील कुमार, दिलीप राम और सुशील—को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं ललित फरार रहा। अदालत ने 26 अक्टूबर 1995 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश करती रही।
क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान पुलिस को उसके मंगोलपुरी फेज-2 में होने की जानकारी मिली। अधिकारियों के मुताबिक, वह वहां एक फैक्ट्री में पैकेजिंग का काम कर रहा था। पुलिस टीम ने उसकी पहचान आधार कार्ड के जरिए सत्यापित की और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी की जानकारी शकरपुर थाने को भी दी गई।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने लंबे समय तक अपनी पहचान और पुराने मामले से जुड़े विवरण छिपाकर अलग-अलग जगहों पर काम किया। जांच के मुताबिक, वारदात के बाद वह करीब वर्ष 2000 तक बिहार में रहा और अलग-अलग स्थानों पर काम करता रहा। इसके बाद वह दिल्ली लौट आया और विभिन्न विनिर्माण इकाइयों में पैकेजिंग मजदूर के तौर पर काम करने लगा।
ललित मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले का रहने वाला बताया गया है और उसने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। पुलिस के अनुसार, वह शुरुआती दौर में घरेलू सहायक के रूप में दिल्ली आया था, जहां उसकी मुलाकात मामले के कुछ अन्य आरोपियों से हुई। बाद में उसके खिलाफ दर्ज मामले में वह फरार हो गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरारी के दौरान आरोपी ने अलग-अलग स्थानों पर काम करके सामान्य जीवन जीने की कोशिश की। जांचकर्ताओं ने उसके पुराने संपर्कों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाई। इसी प्रक्रिया के दौरान मंगोलपुरी में उसके मौजूद होने की जानकारी मिली और क्राइम ब्रांच ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस ने यह भी बताया कि ललित ने मई 2017 में शादी की थी और उसका परिवार भी है। गिरफ्तारी के समय वह फैक्ट्री में मजदूरी कर रहा था। पुलिस अब उसके पुराने संपर्कों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि 1994 की वारदात में उसकी कथित भूमिका और लंबे समय तक फरार रहने की परिस्थितियों को रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट किया जा सके।
करीब तीन दशक पुराने इस मामले में गिरफ्तारी के बाद जांच एक बार फिर आगे बढ़ी है। अब पुलिस पुराने केस रिकॉर्ड, आरोपियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। ललित के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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