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यूपी में भारी बारिश का कहर, 60 घंटे में 56 लोगों की मौत; 1021 मकान क्षतिग्रस्त, नदियां खतरे के निशान के ऊपर

  उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में जनजीवन को
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    उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। राज्य में 1,021 मकानों को भी नुकसान पहुंचा है, जबकि कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हुई है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

     

    बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सीतापुर में सात लोगों की मौत हुई है, जबकि लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच मौतें दर्ज की गई हैं। अयोध्या और गोरखपुर में भी चार-चार लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग जिलों में बारिश, तेज हवाओं, पेड़ गिरने और मकानों को नुकसान पहुंचने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।

     

    बारिश के कारण राज्य में 107 पशुओं की भी मौत होने की जानकारी दी गई है। मकानों के नुकसान की बात करें तो 1,021 घर क्षतिग्रस्त बताए गए हैं। हरदोई में सबसे ज्यादा 272 मकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि सीतापुर में 108 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी है। कई अन्य जिलों में भी कच्चे और कमजोर मकानों पर बारिश का असर पड़ा है। फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।

     

    बारिश के साथ नदियों का जलस्तर बढ़ना भी प्रशासन के लिए बड़ी चिंता बन गया है। बाराबंकी के एल्गिनब्रिज में घाघरा नदी का जलस्तर रविवार सुबह 106.14 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 106.07 मीटर है। अयोध्या में भी नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में राप्ती नदी के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

     

    राज्य के कई हिस्सों में सड़कें और गांव जलभराव की चपेट में आ गए हैं। तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ है। लखनऊ में भी कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और एक सड़क के हिस्से के धंसने की सूचना सामने आई। उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के पास बारिश का पानी जमा हुआ, हालांकि एक्सप्रेसवे पर यातायात जारी रहने की जानकारी दी गई है।

     

    मौसम में बदलाव के बीच राहत की एक बात यह है कि भारी बारिश के लिए जिम्मेदार दबाव क्षेत्र कमजोर होकर अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में बदल गया है। इसके कारण रविवार को बारिश की तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना बनी है। हालांकि नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ प्रभावित और निचले इलाकों में खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है।

     

    राज्य में बारिश की मात्रा भी सामान्य से काफी अधिक रही। 48 घंटे की अवधि में उत्तर प्रदेश में औसतन 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश लगभग 7.6 मिलीमीटर रहती है। यानी बारिश सामान्य से कई गुना अधिक रही। प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। फर्रुखाबाद में सामान्य से सबसे ज्यादा विचलन दर्ज किया गया।

     

    बारिश के बाद राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए अधिकारियों को प्रभावित जिलों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों से संपर्क करने, जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन करने को कहा गया है। फसल नुकसान का सर्वे भी कराया जा रहा है, जिसके आधार पर नियमों के अनुसार सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

     

    प्रशासन ने लोगों से जलभराव और बाढ़ प्रभावित इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है। तेज बहाव वाली नदियों, नालों और जलमग्न रास्तों से दूर रहने की सलाह दी गई है। आपात स्थिति में राहत विभाग की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।  प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और नदियों के बढ़ते जलस्तर पर लगातार नजर रखना है।

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