Last updated: September 28th, 2026 at 03:34 pm

बिहार में पुलिस महानिदेशक यानी DGP के पद पर बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। मौजूदा DGP विनय कुमार के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त बनाए जाने के बाद अब नए पूर्णकालिक DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। विनय कुमार का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होना था, लेकिन उन्होंने उससे पहले ही भारतीय पुलिस सेवा से VRS लेने का फैसला किया। राज्य सरकार ने उनका आवेदन तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया।
विनय कुमार 1991 बैच के बिहार कैडर के IPS अधिकारी हैं। उन्होंने दिसंबर 2024 में बिहार के DGP का पद संभाला था। अब पुलिस सेवा से अलग भूमिका में उन्हें राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। इस पद पर उनका काम सूचना के अधिकार यानी RTI से जुड़े मामलों की सुनवाई और निपटारे से संबंधित होगा।
विनय कुमार के पद से हटने के बाद वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रीता वर्मा को DGP का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वह 1991 बैच की अधिकारी हैं और वर्तमान में होमगार्ड एवं फायर सर्विस से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल रही थीं। नए नियमित DGP की नियुक्ति होने तक कार्यवाहक व्यवस्था जारी रहने की संभावना है।
नए DGP के चयन के लिए राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ IPS अधिकारियों का पैनल तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद प्रस्तावित नामों को संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की प्रक्रिया से गुजरना होगा। रिपोर्टों के अनुसार, UPSC की ओर से तैयार किए जाने वाले पैनल में तीन अधिकारियों के नाम शामिल किए जा सकते हैं, जिनमें से राज्य सरकार नए DGP के लिए चयन करेगी।
इस प्रक्रिया में वरिष्ठता के साथ-साथ अधिकारी का अनुभव, सेवा रिकॉर्ड और निर्धारित पात्रता जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। नए DGP की नियुक्ति केवल राज्य सरकार के स्तर पर तत्काल निर्णय से नहीं होती, बल्कि निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इसलिए अभी किसी एक अधिकारी के नाम को अंतिम नहीं माना जा सकता।
फिलहाल प्रीता वर्मा के पास बिहार पुलिस प्रमुख की कार्यवाहक जिम्मेदारी है। नियमित DGP की नियुक्ति होने तक राज्य पुलिस का प्रशासनिक और परिचालन नेतृत्व इसी व्यवस्था के तहत चलाया जाएगा। इस दौरान कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस प्रशासन से जुड़े सामान्य कामकाज जारी रहेंगे।
विनय कुमार का मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में चयन भी बिहार के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। मुख्य सूचना आयुक्त राज्य सूचना आयोग का नेतृत्व करते हैं और RTI कानून के तहत नागरिकों की ओर से दायर अपीलों और शिकायतों की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्य में नए DGP के चयन को लेकर कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम फैसला चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। वर्तमान रिपोर्टों में प्रीता वर्मा को वरिष्ठ अधिकारियों में प्रमुख नाम के रूप में बताया गया है, हालांकि उन्हें स्थायी DGP नियुक्त किए जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी अलग विषय है।
नए DGP की नियुक्ति ऐसे समय हो रही है जब बिहार पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध की रोकथाम, साइबर अपराध से निपटने और पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने जैसी कई जिम्मेदारियां हैं। राज्य में पुलिस नेतृत्व में होने वाला यह बदलाव आने वाले महीनों में प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण रहेगा।
बिहार पुलिस की कमान कार्यवाहक व्यवस्था के तहत चल रही है और नए पूर्णकालिक DGP के चयन की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। UPSC और राज्य सरकार की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार पुलिस का अगला नियमित DGP कौन होगा।
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