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पोषण माह में बक्सर की बड़ी उपलब्धि, 25 सितंबर तक दर्ज हुई 1.66 लाख से ज्यादा गतिविधियां

  बिहार के बक्सर जिले में राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पोषण और बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों को लेकर
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    बिहार के बक्सर जिले में राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान पोषण और बाल विकास से जुड़ी गतिविधियों को लेकर बड़ी संख्या में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 25 सितंबर 2026 तक जिले के 1,944 आंगनबाड़ी केंद्रों से कुल 1,66,223 गतिविधियां पोषण माह के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की गई हैं। यह निर्धारित लक्ष्य का 101.81 प्रतिशत है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गतिविधियों की संख्या के मामले में बक्सर पूरे बिहार में आगे रहा।

     

    बक्सर जिले में पोषण माह के तहत सभी 10 बाल विकास परियोजनाओं के आंगनबाड़ी केंद्रों को अभियान से जोड़ा गया है। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं के पोषण से संबंधित जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान का उद्देश्य पोषण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है।

     

    इस वर्ष 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है। इसकी केंद्रीय थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। अभियान में संतुलित और विविध आहार, पर्याप्त प्रोटीन, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताजा एवं गर्म पका भोजन, बच्चों के शुरुआती विकास और समुदाय की भागीदारी जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

     

    बक्सर में दर्ज गतिविधियों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी बाल विकास परियोजनाओं को अभियान की गतिविधियों को प्रभावी तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए। सिमरी, नावानगर और ब्रह्मपुर प्रखंडों में अपेक्षाकृत कम गतिविधियों की इंट्री पर अधिकारियों से अधिक सक्रियता के साथ काम करने को कहा गया। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि गतिविधियों को केवल रिकॉर्ड या डैशबोर्ड तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचना जरूरी है।

     

    पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण और शुरुआती विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। बच्चों के लिए खेल, चित्रकला और गीत जैसी गतिविधियों के साथ-साथ माता-पिता को पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिवारों को संतुलित आहार तथा पोषण संबंधी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर है।

     

    इस अभियान में पर्याप्त प्रोटीन और आहार में विविधता को भी महत्वपूर्ण विषय बनाया गया है। दाल, अनाज, मोटे अनाज, दूध और दूध से बने उत्पाद, अंडे, फल, सब्जियां, मेवे और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पोषक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में भी बच्चों और महिलाओं के पोषण के लिए विविध और पर्याप्त पोषक आहार पर जोर दिया गया है।

     

    आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और विविधता को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है। इसके लिए अलग-अलग दिनों में अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करने और भोजन की स्वच्छता तथा गुणवत्ता पर निगरानी रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी प्रबंधन समितियों और स्थानीय लोगों को भी अभियान से जोड़ने की योजना है।

     

    बैठक में कुपोषण से जूझ रही एक बच्ची की स्थिति में सुधार का उदाहरण भी सामने रखा गया। राजपुर प्रखंड के चचरियां गांव की बच्ची की गंभीर पोषण समस्या की पहचान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने की थी। इसके बाद बच्ची को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया और उपचार के साथ पोषण संबंधी सेवाएं दी गईं। बाद में नियमित निगरानी और गृह भ्रमण के जरिए उसकी स्थिति पर नजर रखी गई।

     

    29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच भी पोषण माह के तहत कई गतिविधियां प्रस्तावित हैं। इनमें माताओं और अभिभावकों की भागीदारी, लाभार्थियों तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान, अनुभव साझा करने के कार्यक्रम, बच्चों की रचनात्मक गतिविधियां और पोषण एवं स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी शामिल है। अभियान के दौरान दर्ज होने वाली गतिविधियों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर प्रशासन की निगरानी जारी रहेगी।

     

    बक्सर में दर्ज 1.66 लाख से अधिक गतिविधियां जिले में पोषण माह के दौरान चलाए जा रहे व्यापक अभियान को दर्शाती हैं। हालांकि प्रशासन के लिए आगे की चुनौती इन गतिविधियों की गुणवत्ता और उनके वास्तविक प्रभाव को सुनिश्चित करना है। पोषण माह 8 अक्टूबर तक चलेगा और इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तथा महिलाओं से जुड़े पोषण एवं स्वास्थ्य मुद्दों पर जागरूकता गतिविधियां जारी रहेंगी।

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