Last updated: September 30th, 2026 at 12:19 pm

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दिया। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 से अधिक गवाहों के बयान के बाद अदालत ने दोनों को दोषसिद्ध किया। हालांकि, अदालत ने अभी सजा का ऐलान नहीं किया है। सजा की अवधि और उसके स्वरूप पर अगली सुनवाई में फैसला होगा।
यह मामला मार्च 2025 में मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र से सामने आया था। सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े थे और उस समय लंदन से मेरठ अपने घर लौटे थे। पुलिस जांच के अनुसार, 3 मार्च 2025 को उनकी हत्या की गई और बाद में शव को टुकड़ों में कर एक नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपा दिया गया। ड्रम को सीमेंट आदि से भरकर बंद किए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी। यही नीला ड्रम बाद में इस पूरे मामले की पहचान बन गया।
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था। अभियोजन के अनुसार, दोनों के बीच संबंध थे और सौरभ की हत्या में दोनों की भूमिका थी। हालांकि, मुकदमे के दौरान अदालत में पेश किए गए सबूतों और गवाहियों के आधार पर ही दोषसिद्धि का फैसला हुआ। अदालत ने अब सजा तय करने की प्रक्रिया को अलग चरण में रखा है।
पुलिस जांच के दौरान इस मामले में कई तरह के साक्ष्य जुटाए गए। इनमें घटनास्थल से मिले सामान के साथ नीला ड्रम और ट्रॉली बैग भी शामिल थे। इसके अलावा मोबाइल फोन से संबंधित कॉल डिटेल, चैट और लोकेशन संबंधी रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा रहे। अदालत में अलग-अलग गवाहों के बयान दर्ज किए गए और परिवार के सदस्यों के अलावा पुलिस तथा अन्य संबंधित लोगों की गवाही भी हुई।
मामले की सुनवाई जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में शुरू हुई थी। इसके बाद लगभग 13 महीने तक लगातार न्यायिक प्रक्रिया चली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुकदमे में 126 सुनवाई की तारीखें पड़ीं और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अंतिम बहस सितंबर 2026 में पूरी हुई, जिसके बाद 30 सितंबर को अदालत ने दोषसिद्धि पर अपना फैसला सुनाया।
अदालत में दोषसिद्धि के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण सजा पर सुनवाई का है। दोनों आरोपियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह भी पूछा गया कि क्या वे सजा के संबंध में कुछ कहना चाहते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ने इस संबंध में कुछ कहने से इनकार किया। अभियोजन पक्ष ने मामले में कठोरतम दंड की मांग की है, लेकिन सजा का अंतिम निर्णय अदालत को करना है।
इस मामले में सजा और दोषसिद्धि को अलग-अलग न्यायिक चरणों के रूप में देखना जरूरी है। 30 सितंबर को अदालत ने यह तय किया कि दोनों आरोपी हत्या के मामले में दोषी हैं। अब अदालत अपराध की परिस्थितियों और अन्य कानूनी पहलुओं को देखते हुए सजा पर सुनवाई करेगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि दोनों को कौन-सी सजा मिलेगी, क्योंकि उसका फैसला अभी बाकी है।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की जांच और सुनवाई के दौरान जिस तरह से भौतिक साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहियों को अदालत के सामने रखा गया, उससे यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। अब दोषसिद्धि के बाद न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण सजा तय करने से जुड़ा है। अदालत की अगली सुनवाई में इसी बिंदु पर निर्णय होने की उम्मीद है।
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