Last updated: October 3rd, 2026 at 02:23 pm

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने तीन FIR दर्ज की हैं। ये मामले 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से जुड़े हैं, जिसमें राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस के अनुसार, दो FIR संसद मार्ग थाने में और एक FIR कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी और नई दिल्ली इलाके में निषेधात्मक आदेश लागू थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर की ओर बढ़े। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 550 से लेकर 1,000 तक बताई गई है।
दर्ज FIR में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं का इस्तेमाल किया गया है। इनमें लोक सेवक के आदेश की अवहेलना, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा और अन्य संबंधित प्रावधान शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, FIR में फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल संगठनों और आयोजकों से संबंधित विवरण केस में दर्ज किए गए हैं।
यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए। प्रदर्शन में शामिल समूहों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
2 अक्टूबर को प्रदर्शन को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ा दी गई थी। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए और प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों पर रोका गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में भेजा था। बाद में कई लोगों को रिहा किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
प्रदर्शन का असर दिल्ली की आवाजाही पर भी पड़ा। 2 अक्टूबर को मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा कारणों से यातायात और मेट्रो संचालन प्रभावित हुआ। जंतर-मंतर के आसपास लोगों की आवाजाही नियंत्रित की गई और कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद किए गए थे। इन कदमों का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को बड़ी संख्या में एक जगह एकत्र होने से रोकना था।
3 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन की कोशिश जारी रही। छात्र संगठन AISA समेत कुछ अन्य समूहों के लोग दोबारा वहां पहुंचे। पुलिस ने पहले से ही इलाके में बैरिकेड और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर रखे थे। प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने के बाद कुछ लोगों को फिर हिरासत में लिया गया।
शनिवार को हिरासत में लिए गए लोगों में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव समेत कई अन्य लोग शामिल बताए गए। इससे पहले शुक्रवार को भी दोनों को हिरासत में लिया गया था। शनिवार की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ा रखी थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग से जुड़े SIR मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी जारी है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। इसलिए प्रदर्शन में लगाए गए आरोपों और चुनाव आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।
दिल्ली पुलिस अब दर्ज FIR के आधार पर प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की जांच कर रही है। पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए वीडियो, CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में निषेधात्मक आदेशों का उल्लंघन हुआ और किन लोगों की भूमिका रही।
2 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर तीन FIR दर्ज हो चुकी हैं और 3 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारियों की हिरासत का सिलसिला जारी रहा। केंद्रीय दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस की निगरानी बनी हुई है। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
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