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दिल्ली में फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को ठगी का शिकार बनाने वाले एक फर्जी जॉब प्लेसमेंट नेटवर्क का
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दिल्ली में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को ठगी का शिकार बनाने वाले एक फर्जी जॉब प्लेसमेंट नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मध्य दिल्ली के रंजीत नगर इलाके में चल रहे दो कथित फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 11 लोगों को पकड़ा गया है। ये आरोपी ऑनलाइन जॉब पोर्टल से नौकरी तलाशने वाले युवाओं का डेटा हासिल कर उन्हें आकर्षक नौकरी का झांसा देते थे और बाद में रजिस्ट्रेशन तथा प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे वसूलते थे।

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    पुलिस के अनुसार दोनों कॉल सेंटर शादीपुर मेट्रो स्टेशन के पास एक ही इमारत में संचालित किए जा रहे थे। इन पर अलग-अलग कार्रवाई की गई। पहले सेंटर से चार महिलाओं सहित छह लोगों को पकड़ा गया, जबकि दूसरे सेंटर से पांच पुरुषों को हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान पुलिस को वहां से बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम और मोबाइल फोन मिले।

     

    आरोपियों पर नौकरी की तलाश कर रहे लोगों का व्यक्तिगत डेटा और मोबाइल नंबर ऑनलाइन जॉब-सर्च तथा भर्ती प्लेटफॉर्म से हासिल करने का आरोप है। इसके बाद खुद को रिक्रूटर बताकर उम्मीदवारों को फोन किया जाता था। कॉल के दौरान उन्हें आकर्षक नौकरी और बेहतर वेतन का भरोसा दिया जाता था। उम्मीदवारों के भरोसे में आने के बाद अलग-अलग बहानों से रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस मांगी जाती थी।

     

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने अलग-अलग मामलों में 1,200 रुपये, 1,400 रुपये और 3,500 रुपये तक की फीस मांगने की व्यवस्था बना रखी थी। रकम मिलने के बाद आरोपी कुछ दिनों तक उम्मीदवारों के संपर्क में रहते थे और उन्हें नौकरी से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी होने का भरोसा दिलाते थे। इसके बाद कथित तौर पर उनसे संपर्क बंद कर दिया जाता था और नौकरी नहीं दी जाती थी।

     

    मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीमों ने तकनीकी जांच और मैदानी सत्यापन किया। इसके बाद दोनों ठिकानों पर छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान कुल 13 कंप्यूटर सिस्टम और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए। कंप्यूटरों में नौकरी चाहने वालों का डेटा, संपर्क विवरण, कॉलिंग एप्लीकेशन और अन्य डिजिटल सामग्री मिली।

     

    जांच में इंटरनेट आधारित VoIP कॉलिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। इस तकनीक के जरिए आरोपी बड़ी संख्या में नौकरी तलाशने वालों को फोन करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नौकरी चाहने वालों का डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इस नेटवर्क से कितने लोग प्रभावित हुए हैं।

     

    पुलिस ने दोनों स्थानों से डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य भी जुटाए हैं। अधिकारियों के अनुसार जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि इन कॉल सेंटरों के पीछे वास्तविक संचालक और मास्टरमाइंड कौन हैं। पकड़े गए लोगों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

     

    नौकरी के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऐसे मामलों में ठग अक्सर बेरोजगार युवाओं की नौकरी की जरूरत का फायदा उठाते हैं। आकर्षक वेतन, बड़ी कंपनियों में नौकरी और जल्दी नियुक्ति का भरोसा देकर पहले उम्मीदवारों से संपर्क किया जाता है और फिर अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं।

     

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी के लिए किसी अनजान व्यक्ति या एजेंसी को पैसे देने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करें। किसी कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया से नौकरी की जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। केवल फोन पर मिले ऑफर या बिना सत्यापन के भेजे गए नियुक्ति पत्र पर भरोसा करने से बचना चाहिए।

     

    मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने नौकरी तलाशने वालों को निशाना बनाया और उनके जरिए कितनी रकम की ठगी की गई। साथ ही डेटा के स्रोत और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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