Last updated: October 7th, 2026 at 03:17 pm

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार, 7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आक्रोश मार्च निकाला। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के आरोप रहे। पटना में भी RJD, कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने प्रदर्शन किया और CEC के इस्तीफे की मांग की।
पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले भी जलाए। नेताओं ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
RJD और कांग्रेस समेत विपक्षी दल लंबे समय से SIR को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी तेज कर दी है। प्रदर्शन के दौरान ‘ज्ञानेश हटाओ, लोकतंत्र बचाओ’ जैसे नारे लगाए गए।
इससे पहले RJD नेता तेजस्वी यादव ने 7 अक्टूबर को पूरे बिहार में प्रखंड स्तर पर आक्रोश मार्च आयोजित करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि SIR में कथित अनियमितताओं के खिलाफ INDIA गठबंधन जनता के बीच जाकर अपनी बात रखेगा। इसके बाद 8 अक्टूबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन करने और पटना में लोक भवन की ओर मार्च निकालने का कार्यक्रम घोषित किया गया है।
विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है तो उसके मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी वजह से वे चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और प्रभावित मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों के प्रति समान दूरी बनाए रखनी चाहिए और मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। विपक्ष इस मुद्दे को केवल बिहार तक सीमित नहीं मान रहा, बल्कि इसे लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बता रहा है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखने के लिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया जरूरी है। आयोग का उद्देश्य अपात्र, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाना और योग्य नागरिकों के नाम सूची में बनाए रखना है। बीजेपी भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताती रही है।
बिहार में यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में SIR को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस काफी तेज रही है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की है। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और विश्वसनीय बनाना चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।
बुधवार को पटना में हुए प्रदर्शन के साथ ही दिल्ली में भी INDIA गठबंधन के नेताओं ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। दिल्ली में राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इससे साफ है कि SIR का मुद्दा अब बिहार की राजनीति से आगे बढ़कर राष्ट्रीय राजनीतिक टकराव का बड़ा विषय बन चुका है।
बिहार में 7 अक्टूबर के आक्रोश मार्च के बाद 8 अक्टूबर को भी जिला स्तर पर प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और प्रदर्शन और तेज होने की संभावना है।
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