Last updated: October 7th, 2026 at 03:21 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन कई प्रमुख नदियों का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। गंगा, गंडक, कोसी और बूढ़ी गंडक जैसी नदियों के कई स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि ज्यादातर जगहों पर पानी घटने का रुख दिखाई दे रहा है, लेकिन प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था जारी रखी है।
बिहार जल संसाधन विभाग के 7 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक नदी 62.24 मीटर पर बह रही थी, जबकि यहां खतरे का निशान 62.22 मीटर है। यानी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से थोड़ा ऊपर बना हुआ है। यहां जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया गया है। पश्चिम चंपारण के बगहा में भी गंडक खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई है।
कोसी नदी को लेकर भी कई इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। सुपौल के बीरपुर में कोसी का जलस्तर 74.98 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 74.70 मीटर है। खगड़िया के बलतारा में भी कोसी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि दोनों स्थानों पर जलस्तर में तत्काल तेजी के बजाय स्थिर या घटने का रुख दर्ज किया गया है।
गंगा नदी का जलस्तर भी बिहार के कई हिस्सों में चिंता का कारण बना हुआ है। पटना के हाथीदह में गंगा 41.79 मीटर पर थी, जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है। भागलपुर के सुल्तानगंज में नदी का जलस्तर 35.91 मीटर दर्ज किया गया, जो 34.50 मीटर के खतरे के निशान से काफी ऊपर है। कहलगांव और आजमाबाद में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई है।
बूढ़ी गंडक की स्थिति भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। खगड़िया में नदी का जलस्तर 37.17 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 36.58 मीटर है। मुजफ्फरपुर के कांटी में भी बूढ़ी गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। हालांकि इन दोनों जगहों पर पानी घटने का रुख दर्ज किया गया है, जिससे प्रशासन को कुछ राहत मिली है।
राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर में कमी आने के बावजूद तटबंधों, नदी किनारे के गांवों और निचले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पानी घटने के दौरान कहीं तटबंध कमजोर होने या कटाव की स्थिति न पैदा हो।
पिछले दिनों गंडक नदी के उफान के कारण सारण समेत कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई थी। कुछ स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचने के बाद पानी नए इलाकों में भी फैल गया था। प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन और आपदा राहत टीमें लगातार काम कर रही हैं।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राज्य में राहत और बचाव कार्य भी जारी हैं। प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन के साथ आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें तैनात हैं। कई स्थानों पर नावों के जरिए लोगों और जरूरी सामान की आवाजाही कराई जा रही है। जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, वहां राहत सामग्री पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हालांकि 7 अक्टूबर को ज्यादातर प्रमुख नदियों में जलस्तर घटने की खबर से स्थिति में सुधार की उम्मीद बढ़ी है। सरकारी निगरानी आंकड़ों में कई स्थानों पर पानी कम होने का रुझान दर्ज किया गया है। इसके बावजूद गंगा, गंडक, कोसी और बूढ़ी गंडक के कई गेजों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है, इसलिए तत्काल पूरी तरह खतरा टलने की स्थिति नहीं मानी जा रही है।
नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा। प्रशासन की कोशिश है कि पानी घटने के साथ प्रभावित इलाकों में सामान्य स्थिति जल्द बहाल हो और लोगों को सुरक्षित तरीके से उनके घरों तक वापस पहुंचाया जा सके। बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत कार्य और नदी जलस्तर की निगरानी लगातार जारी है।
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