Last updated: October 8th, 2026 at 02:02 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दीपावली से पहले शहरवासियों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के तहत डालीगंज और पक्का पुल के बीच बन रहा शहर का सबसे ऊंचा फ्लाईओवर अब लगभग तैयार हो चुका है। इसे दीपावली से पहले आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है। फ्लाईओवर के शुरू होने से पुराने लखनऊ के करीब 10 लाख लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
यह फ्लाईओवर पक्का पुल यानी हार्डिंग ब्रिज और डालीगंज रोटरी के बीच बनाया गया है। इसकी लंबाई करीब 1.1 किलोमीटर है और यह दो लेन का है। रेलवे ब्रिज के ऊपर बने इस फ्लाईओवर की जमीन से ऊंचाई करीब 25 मीटर है। यही ऊंचाई इसे लखनऊ के सबसे ऊंचे फ्लाईओवरों में शामिल करती है। परियोजना का मुख्य ढांचा तैयार हो चुका है और अब डामरीकरण तथा स्ट्रीट लाइट लगाने जैसे अंतिम काम किए जा रहे हैं।
अधिकारियों की योजना है कि अक्टूबर के अंत तक बाकी सभी काम पूरे कर लिए जाएं और दीपावली से पहले इसे यातायात के लिए खोल दिया जाए। इसके चालू होने के बाद डालीगंज से पक्का पुल तक का सफर करीब दो मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। इससे इस इलाके में रोजाना आने-जाने वाले लोगों को काफी समय बचाने में मदद मिलेगी।
फ्लाईओवर का सबसे बड़ा फायदा पुराने लखनऊ की आबादी को मिलने वाला है। अधिकारियों के अनुसार, इसके शुरू होने से पक्का पुल से समतामूलक चौराहे तक सीधा आवागमन बेहतर होगा। इस पूरे क्षेत्र में लंबे समय से यातायात का दबाव रहता है। खासकर व्यस्त समय में वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है। नए फ्लाईओवर से मुख्य यातायात को ऊपर से निकालने में मदद मिलेगी और नीचे की सड़कों पर भी दबाव कम होने की उम्मीद है।
इस परियोजना का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा इंटीग्रेटेड रोटरी है। फ्लाईओवर पर चढ़ने और उतरने वाले वाहनों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए टीले वाली मस्जिद के पास इंटीग्रेटेड रोटरी बनाने की योजना है। इसके लिए तकनीकी स्तर पर अध्ययन भी कराया गया है। इसका उद्देश्य फ्लाईओवर के आसपास ट्रैफिक को सुचारू रखना और वाहनों के बीच अनावश्यक टकराव या जाम की स्थिति को कम करना है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने हाल ही में निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बचे हुए कामों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए। मुख्य निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब सड़क की सतह तैयार करने और प्रकाश व्यवस्था लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है। समय पर काम पूरा होने की स्थिति में दीपावली के आसपास शहरवासियों को इस नए मार्ग का लाभ मिलना शुरू हो सकता है।
फ्लाईओवर शुरू होने के बाद पुराने लखनऊ से जुड़े कई प्रमुख रास्तों पर यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बसंतकुंज से समतामूलक चौराहे तक करीब 12 किलोमीटर का सफर लगभग 20 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे रोजाना नौकरी, कारोबार, पढ़ाई और अन्य कामों के लिए सफर करने वाले लोगों को खास राहत मिल सकती है।
परियोजना से जुड़े एक अन्य प्रस्ताव के तहत पक्का पुल के भविष्य में पैदल यात्रियों के लिए इस्तेमाल किए जाने की भी योजना है। नए पुल के तैयार होने के बाद पुराने पक्का पुल पर वाहनों की आवाजाही को लेकर बदलाव किया जा सकता है। इससे क्षेत्र में वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही को अलग-अलग व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
लखनऊ में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के बीच शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डालीगंज-पक्का पुल फ्लाईओवर के शुरू होने से पुराने शहर और आसपास के इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि निर्माण के अंतिम काम कितनी तेजी से पूरे होते हैं और दीपावली से पहले फ्लाईओवर को वास्तव में यातायात के लिए कब खोला जाता है।
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