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बिहार में SIR के खिलाफ INDIA गठबंधन का आक्रोश मार्च, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन तेज

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विरोध लगातार तेज हो रहा है। गुरुवार
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बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विरोध लगातार तेज हो रहा है। गुरुवार को INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पटना में SIR के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाला। इस दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दलों समेत गठबंधन के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

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    पटना में निकाले गए इस मार्च का उद्देश्य SIR के जरिए मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। नेताओं ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था है और किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी भी की।

     

    आक्रोश मार्च के दौरान विपक्षी नेताओं ने कहा कि SIR की प्रक्रिया को लेकर बिहार में लोगों के बीच कई तरह की चिंताएं हैं। खास तौर पर दस्तावेजों और मतदाता की पात्रता से जुड़े नियमों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जिन लोगों के पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। गठबंधन के नेताओं ने मांग की कि प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और किसी भी मतदाता का नाम पर्याप्त जांच के बिना सूची से नहीं हटाया जाए।

     

    प्रदर्शन के दौरान INDIA गठबंधन के नेताओं ने केंद्र और चुनाव आयोग दोनों पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर चुनाव के नतीजों और नागरिकों के मतदान अधिकार पर पड़ सकता है। इसी वजह से वे इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक मंचों पर उठा रहे हैं। पटना में हुआ मार्च भी इसी अभियान का हिस्सा रहा।

     

    बिहार में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद पहले से ही चल रहा है। विपक्षी दल लगातार दावा करते रहे हैं कि पुनरीक्षण के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है। आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना और मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना है।

     

    पटना के प्रदर्शन में नेताओं ने राज्यपाल भवन की ओर मार्च करने की कोशिश भी की। विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन देना चाहते हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। प्रदर्शनकारियों को निर्धारित मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था के भीतर रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई। राजधानी में राजनीतिक गतिविधि बढ़ने के कारण कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

     

    विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग SIR से जुड़े सवालों का पर्याप्त समाधान नहीं कर रहा है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर INDIA गठबंधन के नेता लगातार अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।

     

    वहीं, चुनाव आयोग की ओर से बार-बार यह स्पष्ट किया गया है कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने, हटाने या सुधार करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। जिन लोगों को किसी बदलाव पर आपत्ति है, वे तय प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। आयोग का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची तैयार करने से पहले संबंधित दावों और आपत्तियों की जांच की जाती है।

     

    बिहार की राजनीति में SIR का मुद्दा आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकता है। राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज होने के साथ मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता और मतदान के अधिकार से जोड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की नियमित प्रक्रिया के रूप में देखता है।

     

     

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