Last updated: October 9th, 2026 at 03:19 pm

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में 1,725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस योजना का उद्देश्य लोगों को आरामदायक और सुविधाजनक सफर उपलब्ध कराना, शहरों में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाना और प्रदूषण कम करने में मदद करना है। नई बसों के संचालन से लाखों यात्रियों को आने वाले समय में फायदा मिलने की उम्मीद है।
सरकार की योजना के तहत लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, अयोध्या और नोएडा समेत प्रदेश के 18 शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। इन बसों में नौ मीटर और 12 मीटर लंबाई वाली एसी बसें शामिल होंगी। बसों के संचालन की जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों को दी जाएगी, जबकि किराया और सेवा से जुड़े प्रमुख नियम सरकार तय करेगी।
इस योजना में लखनऊ और कानपुर को सबसे ज्यादा बसें मिलेंगी। दोनों शहरों में 300-300 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। वाराणसी को 250 और गोरखपुर को 150 बसें मिलेंगी। आगरा, गाजियाबाद, मेरठ और नोएडा, जिसमें जेवर क्षेत्र भी शामिल है, को 100-100 बसें आवंटित की जाएंगी। मथुरा-वृंदावन, अयोध्या और प्रयागराज में 50-50 बसें चलाई जाएंगी।
इसके अलावा अलीगढ़, फिरोजाबाद, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर और झांसी में 25-25 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। इस तरह छोटे और बड़े शहरों को उनकी जरूरत के हिसाब से बसें उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
इस परियोजना को ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट यानी जीसीसी मॉडल पर लागू किया जाएगा। इस मॉडल के तहत निजी कंपनियां बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन के लिए जरूरी उपकरणों की व्यवस्था, ड्राइवरों और तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति तथा बसों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगी। इससे सरकार को बसें खरीदने और उनका पूरा संचालन सीधे अपने स्तर पर करने का खर्च उठाने की जरूरत कम होगी।
सरकार ने इस योजना के तहत बसों की लागत में सहायता देने का भी फैसला किया है। 12 मीटर की प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस के लिए 40 लाख रुपये और नौ मीटर की बस के लिए 35 लाख रुपये की सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण की ओर से बस डिपो बनाने के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। अनुबंध की अवधि व्यावसायिक संचालन शुरू होने की तारीख से 12 वर्ष निर्धारित की गई है।
नई इलेक्ट्रिक बसों से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। एसी बसों में सफर करना गर्मी के मौसम में अधिक आरामदायक हो सकता है। इसके अलावा, नियमित बस सेवाएं उपलब्ध होने से छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और रोजाना यात्रा करने वाले दूसरे यात्रियों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक सुविधा इस बात पर निर्भर करेगी कि बसें किन मार्गों पर चलती हैं, उनकी आवृत्ति कितनी रहती है और संचालन व्यवस्था कितनी प्रभावी होती है।
इलेक्ट्रिक बसें डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की तुलना में सड़क पर सीधे धुआं नहीं छोड़तीं। इसलिए इनका विस्तार शहरी वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयासों में मदद कर सकता है। हालांकि, पर्यावरण को होने वाला कुल लाभ बिजली उत्पादन के स्रोत और चार्जिंग व्यवस्था पर भी निर्भर करेगा।
सरकार के सामने अब इस योजना को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। इसके लिए निजी ऑपरेटरों का चयन, बसों की खरीद, चार्जिंग सुविधाओं की स्थापना, डिपो तैयार करना और रूट निर्धारित करना जैसे काम पूरे करने होंगे। यदि ये तैयारियां समय पर पूरी होती हैं, तो उत्तर प्रदेश के 18 शहरों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
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