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दिल्ली में CEC के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन तेज, 8 दिनों में 25 FIR दर्ज; राहुल और प्रियंका गांधी के नाम भी शामिल

  दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के
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    दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली पुलिस ने 25 प्राथमिकी यानी FIR दर्ज की हैं। पुलिस के अनुसार, ये मामले 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर के बीच राजधानी में हुए अलग-अलग प्रदर्शनों से जुड़े हैं। इन मामलों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट या धक्का-मुक्की, सरकारी काम में बाधा डालने और प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन जैसे आरोप शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने राजधानी में राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।

     

    विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठाए गए सवाल हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग और सरकार की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनावी रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की प्रक्रिया बताया गया है।

     

    दिल्ली में 2 अक्टूबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और निर्वाचन आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था और लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कई जगह उन्हें आगे बढ़ने से रोका। कुछ प्रदर्शनों के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। बाद में कई लोगों को रिहा कर दिया गया।

     

    पुलिस की ओर से दर्ज मामलों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम भी शामिल बताए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने और पुलिस के काम में बाधा डालने सहित विभिन्न आरोपों की जांच की जा रही है। हालांकि, FIR में नाम आने का अर्थ अपने आप में किसी व्यक्ति का दोषी साबित होना नहीं है। संबंधित आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है।

     

    प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली के मध्य क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। पुलिस ने प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाए और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया। प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव भी किए गए। इन कदमों का उद्देश्य सरकारी प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया।

     

    विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। उनका तर्क है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटता है, तो वह चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित हो सकता है। विपक्ष इस प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

     

    पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और लागू आदेशों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा दर्ज FIR में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। इन मामलों में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

     

    दिल्ली में लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में प्रदर्शन जारी रहने की संभावना के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम भी किए हैं।

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