Last updated: October 10th, 2026 at 10:07 am

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में गलत दावे करने के लिए कर रहा है। भारत ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की चौथी समिति में उपनिवेशवाद-मुक्ति पर चर्चा के दौरान सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान का जवाब देने के भारत के अधिकार का इस्तेमाल किया। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भी सोशल मीडिया मंच X पर उनका बयान साझा किया।
मेवाड़ ने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर को लेकर बार-बार संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, वहां के लोगों को दमन, स्थानीय संसाधनों के शोषण और मौलिक अधिकारों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने पाकिस्तान में सैन्य शासन, चुनावी प्रक्रिया, राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी और आतंकवाद को लेकर भी आलोचना की। मेवाड़ ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों पर टिप्पणी करने से पहले अपने यहां की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने इस दौरान फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर उसकी संप्रभुता का अभिन्न हिस्सा है।
UN अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया
संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति के 81वें सत्र के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों से जुड़े कथित आपराधिक कृत्यों और अनुचित व्यवहार के मामलों में जवाबदेही मजबूत करने की मांग की।
इस विषय पर भारत का राष्ट्रीय बयान देते हुए सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि ऐसे मामलों में भारत की नीति जीरो टॉलरेंस की है। उन्होंने आरोपों की रिपोर्टिंग, जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र तथा सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच, संयुक्त राष्ट्र के कानूनी मामलों के कार्यालय ने 93 अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों से संबंधित 93 मामले जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित देशों को भेजे थे।
उन्होंने कहा कि मामलों को संबंधित देशों तक पहुंचाने के बाद समय पर जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है। सरोज ने देशों से अपने घरेलू कानूनों के तहत विदेश में अपने नागरिकों द्वारा किए गए गंभीर अपराधों पर कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने पर भी विचार करने का आग्रह किया।
उन्होंने पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, निष्पक्ष प्रक्रिया तथा सभी संबंधित लोगों के अधिकारों के सम्मान को भी जरूरी बताया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए ऐसे मामलों को रोकने पर जोर दिया।
भारत के कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सरोज ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 और प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 का हवाला दिया। उन्होंने यौन शोषण और दुर्व्यवहार के पीड़ितों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के ट्रस्ट फंड को समर्थन जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
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