Last updated: October 11th, 2026 at 02:25 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया। कहासुनी से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते धक्का-मुक्की, नारेबाजी और जूते-चप्पल चलने तक पहुंच गया। घटना के वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
यह कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस संगठन में नए नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के अवसर पर आयोजित किया गया था। आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटी है। हालांकि, पदभार ग्रहण के मौके पर हुआ विवाद राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों और दूसरे गुट के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया। बताया गया कि अजय राय अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान रास्ता देने और नारेबाजी को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई। कुछ ही देर में कहासुनी तेज हो गई और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। स्थिति बिगड़ने पर कुछ लोगों के हाथों में जूते-चप्पल दिखाई दिए और उन्हें फेंके जाने की भी खबर सामने आई।
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हंगामा कई मिनट तक चलता रहा। पार्टी कार्यालय में मौजूद लोगों ने स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। घटना के दौरान वरिष्ठ नेताओं को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी अजय राय को समझाते हुए नजर आए। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और मामले को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।
विवाद के बाद अजय राय नाराज होकर पार्टी कार्यालय से बाहर चले गए और विरोध जताया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार पर आपत्ति जताई तथा पार्टी नेतृत्व से मामले में कार्रवाई की मांग की। कुछ रिपोर्टों में उनके द्वारा संबंधित महिला नेता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, विवाद की शुरुआत और उसमें शामिल अलग-अलग लोगों की भूमिका को लेकर सामने आए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बाद में वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से स्थिति को शांत करने का प्रयास किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अजय राय ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के बाद अपना विरोध समाप्त किया। इस पूरे घटनाक्रम ने नए नेतृत्व के सामने संगठन में एकजुटता बनाए रखने की चुनौती को उजागर किया है। फिलहाल पार्टी की ओर से विवाद के संबंध में किसी अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने पदभार ग्रहण करने के बाद पार्टी संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर जोर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को कांग्रेस की प्राथमिकता बताया। साथ ही बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार को घेरा। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की चिंताओं को दोहराया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए आने वाले महीनों में संगठनात्मक मजबूती बेहद महत्वपूर्ण होगी। राज्य में पार्टी को अपना जनाधार बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने की जरूरत है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों के बीच सार्वजनिक रूप से विवाद सामने आना पार्टी की छवि पर असर डाल सकता है। राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से भी यह घटना बताती है कि नए नेतृत्व के लिए संगठन में समन्वय और अनुशासन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में हुए हंगामे के बाद अब नजर पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर है। विवाद में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करने, संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पार्टी क्या कदम उठाती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल इस घटना ने आराधना मिश्रा के नेतृत्व की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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