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सहारनपुर में प्रदूषण के विरोध ने लिया हिंसक रूप, टायर फैक्ट्री मालिक की पीट-पीटकर हत्या; कई आरोपी गिरफ्तार

  उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में टायर फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और दुर्गंध को लेकर शुरू हुआ विवाद
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    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में टायर फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और दुर्गंध को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। गंगोह थाना क्षेत्र के कल्लरहेड़ी गांव के पास स्थित एक फैक्ट्री में ग्रामीणों और फैक्ट्री पक्ष के बीच हुई मारपीट में मालिक अरबीन चौहान की मौत हो गई, जबकि उनके भतीजे सादिक समेत दूसरे पक्ष का एक व्यक्ति भी घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

     

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह फैक्ट्री पुराने टायरों को गलाकर उनसे तेल निकालने का काम करती थी। आसपास के कुछ ग्रामीणों का आरोप था कि फैक्ट्री से निकलने वाला धुआं और दुर्गंध उनके लिए परेशानी का कारण बन रहे थे। लोगों का कहना था कि इससे आसपास के वातावरण पर असर पड़ रहा था और उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच पहले भी विवाद होने की बात सामने आई है।

     

    बताया गया कि शुक्रवार रात ग्रामीणों का एक समूह फैक्ट्री परिसर में पहुंचा। शुरुआत में धुएं और प्रदूषण को लेकर बातचीत हुई, लेकिन कुछ ही समय में मामला कहासुनी से आगे बढ़ गया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर फैक्ट्री मालिक अरबीन चौहान और उनके भतीजे सादिक भी वहां पहुंचे। आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने उन पर लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया।

     

    हमले में अरबीन चौहान गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनके भतीजे सादिक को भी गंभीर चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। दूसरे पक्ष से संजय उर्फ संदीप के घायल होने की भी खबर है। घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मामले की जांच शुरू कर दी।

     

    पुलिस ने फैक्ट्री के चौकीदार की शिकायत के आधार पर कई लोगों के खिलाफ हत्या समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। शुरुआती रिपोर्टों में 11 लोगों के नाम सामने आए। बाद में पुलिस ने कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना से जुड़े साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, ताकि मारपीट में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

     

    घटना के बाद मृतक के परिवार और ग्रामीणों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और दुर्गंध के कारण वे लंबे समय से परेशान थे और इसी समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे। दूसरी ओर, फैक्ट्री मालिक के परिजनों ने आरोप लगाया कि विवाद के पीछे केवल प्रदूषण का मुद्दा नहीं था। परिवार की ओर से पांच लाख रुपये की कथित रंगदारी मांगने का आरोप भी लगाया गया है। इस संबंध में अलग शिकायत दिए जाने की खबर है। हालांकि, रंगदारी के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

     

    मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू फैक्ट्री की अनुमति और पर्यावरणीय नियमों से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से फैक्ट्री को अनुमति दिए जाने की बात कही गई है और बोर्ड ने शिकायत मिलने के संबंध में भी जानकारी दी है। ऐसे में यह जांच जरूरी हो जाती है कि फैक्ट्री निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही थी या नहीं, और स्थानीय लोगों की शिकायतों पर संबंधित विभागों ने क्या कार्रवाई की थी।

     

    इस घटना ने औद्योगिक गतिविधियों और ग्रामीण आबादी के बीच पर्यावरण संबंधी विवादों के समाधान पर सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी फैक्ट्री से धुआं, दुर्गंध या प्रदूषण फैलने की शिकायत है, तो उसकी जांच संबंधित पर्यावरण विभाग और प्रशासन को करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर निरीक्षण, प्रदूषण की माप और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह, किसी भी विवाद में हिंसा और कानून अपने हाथ में लेना गंभीर अपराध है।

     

    पुलिस हत्या के मामले, कथित रंगदारी की शिकायत और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवाद किस तरह बढ़ा, हमले में किसकी क्या भूमिका थी और फैक्ट्री से जुड़े पर्यावरणीय आरोपों में कितनी सच्चाई है। घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि स्थानीय शिकायतों का समय रहते निष्पक्ष समाधान न होने पर तनाव बढ़ सकता है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में हिंसा किसी समस्या का वैध समाधान नहीं हो सकती।

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