Last updated: October 13th, 2026 at 03:17 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिवाली से पहले बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने जा रही है। शहर में तीन नए बिजली उपकेंद्र चालू करने की तैयारी है। इनमें बसंतकुंज योजना के सेक्टर-आई और सेक्टर-जे तथा गोमतीनगर का विशेषखंड उपकेंद्र शामिल हैं। इन उपकेंद्रों के शुरू होने से करीब 1.50 लाख लोगों को बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों के निवासियों को फायदा होगा, जहां गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के कारण आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।
लखनऊ में तेजी से बढ़ती आबादी और नए आवासीय क्षेत्रों के विस्तार के साथ बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुराने बिजली उपकेंद्रों पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाना जरूरी हो गया है। नए उपकेंद्रों के निर्माण से बिजली वितरण व्यवस्था का भार अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकेगा। इससे मौजूदा बिजलीघरों पर दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत बेहतर आपूर्ति मिलने की संभावना है।
बसंतकुंज योजना के सेक्टर-आई और सेक्टर-जे में दो नए बिजली उपकेंद्र बनाए जा रहे हैं। दोनों उपकेंद्रों की क्षमता 2×10 एमवीए रखी गई है। सेक्टर-जे उपकेंद्र के पावर ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत किया जा चुका है। इस उपकेंद्र को 132 केवी जेहटा ट्रांसमिशन उपकेंद्र से 33 केवी की भूमिगत डबल सर्किट लाइन के जरिए बिजली मिलेगी। इससे बसंतकुंज योजना और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति मजबूत होने की उम्मीद है।
वहीं, सेक्टर-आई उपकेंद्र में भी 10-10 एमवीए क्षमता वाले दो पावर ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। हालांकि, यहां भूमिगत केबल बिछाने का काम बारिश के कारण प्रभावित हुआ है। संबंधित काम पूरा होने के बाद उपकेंद्र को चालू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इन दोनों उपकेंद्रों से दुबग्गा और राष्ट्र प्रेरणा स्थल के आसपास के इलाकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
बसंतकुंज क्षेत्र में अभी पुराने बिजली उपकेंद्रों से आपूर्ति की जाती है। गर्मियों के दौरान जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब ट्रांसफार्मरों और वितरण नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसके कारण कई जगह बिजली कटौती और कम वोल्टेज की समस्या सामने आती है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरों में पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। नए उपकेंद्र चालू होने से इन समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
गोमतीनगर के विशेषखंड में भी नया बिजली उपकेंद्र निर्माण के अंतिम चरण में है। इसके चालू होने से विशेषखंड, विक्रांतखंड और विभूतिखंड के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने की योजना है। गोमतीनगर क्षेत्र में नए बिजलीघरों के निर्माण का उद्देश्य पुराने उपकेंद्रों पर निर्भरता कम करना और बढ़ती मांग के अनुसार बिजली वितरण नेटवर्क का विस्तार करना है।
इससे पहले गोमतीनगर के विनम्रखंड क्षेत्र में नए 33/11 केवी उपकेंद्र से लगभग पांच हजार उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति शुरू की जा चुकी है। विनम्रखंड उपकेंद्र से वास्तुखंड, विनम्रखंड और मल्हौर रोड के आसपास के क्षेत्रों को बिजली दी जा रही है। नए बिजलीघरों के माध्यम से आसपास के पुराने उपकेंद्रों से कुछ उपभोक्ताओं का भार स्थानांतरित किया जा सकेगा, जिससे ओवरलोडिंग कम करने में मदद मिलेगी।
बिजली विभाग और संबंधित एजेंसियों के सामने अब शेष निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने की चुनौती है। खासकर भूमिगत केबल बिछाने और तकनीकी जांच जैसी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही संबंधित उपकेंद्रों को नियमित आपूर्ति के लिए चालू किया जा सकेगा। इसलिए तीनों उपकेंद्रों से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन वास्तविक लाभ उनके पूरी तरह चालू होने और उपभोक्ताओं का भार स्थानांतरित किए जाने के बाद सामने आएगा।
दिवाली से पहले इन बिजली उपकेंद्रों को चालू करने की तैयारी लखनऊ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। यदि निर्धारित समय पर काम पूरा हो जाता है, तो बड़ी आबादी को बेहतर बिजली आपूर्ति मिल सकती है। इससे आने वाली गर्मियों में भी बिजली की बढ़ती मांग को संभालने और लो-वोल्टेज तथा कटौती की समस्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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