Human Live Media

HomeNewsदिल्ली में मेट्रो गेट बंद करने पर पुलिस ने मांगी माफी, इंटरनेट शटडाउन पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई

दिल्ली में मेट्रो गेट बंद करने पर पुलिस ने मांगी माफी, इंटरनेट शटडाउन पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद रखने के मामले
watermarked_img_16378370581702854262

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद रखने के मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। केंद्र सरकार ने कहा कि संभावित गड़बड़ी और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए थे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने मेट्रो गेट बंद किए जाने के मामले में अदालत से बिना शर्त माफी मांगी है।

Table of Contents

    केंद्र सरकार ने क्या कहा?

    अवमानना याचिका के जवाब में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की ओर से दाखिल हलफनामे में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन करने से इनकार किया। सरकार के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर संभावित अशांति को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद करने का फैसला लिया गया था।

    सरकार ने अदालत को बताया कि यह कदम किसी न्यायिक आदेश की अवहेलना करने के इरादे से नहीं उठाया गया था। मामले में दाखिल हलफनामे के आधार पर अब अदालत के सामने सुरक्षा संबंधी फैसलों और उनके औचित्य का सवाल है।

    मेट्रो गेट बंद करने पर दिल्ली पुलिस ने मांगी माफी

    मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने के मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें पुलिस ने अदालत से बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी। यह जवाब शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर अवमानना याचिका के सिलसिले में दिया गया।

    याचिका में आरोप लगाया गया था कि जीटीबी नगर और विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने समेत विरोध प्रदर्शन से पहले लगाए गए कुछ प्रतिबंध सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ थे।

    मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन का ऐलान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया था। दिल्ली पुलिस ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी।

    प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस ने 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने का प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को भेजा था। पुलिस ने मेट्रो की फ्रीक्वेंसी कम करने का अनुरोध भी किया था। इसके पीछे संवेदनशील इलाकों में भीड़ बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बताई गई थी।

    सड़कों पर भी लागू किए गए थे प्रतिबंध

    प्रशासन की ओर से 10 और 11 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों और चौराहों पर ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी दी गई थी। लोगों को यात्रा की पहले से योजना बनाने, गैर-जरूरी सफर से बचने और ट्रैफिक पुलिस के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई थी।

    अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर

    इंटरनेट सेवाओं को बंद करने और मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखने को लेकर दायर अवमानना याचिका में प्रतिबंधों की वैधता और अदालत के निर्देशों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं। केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है, जबकि दिल्ली पुलिस ने मेट्रो गेट बंद करने के मामले में माफी मांगी है। अब मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई और रुख अहम होगा।

    Loading

    Comments are off for this post.