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राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले- ‘बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल युवाओं को गुमराह कर देश में अराजकता फैलाने और बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर भी सवाल उठाए और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी स्थिति को लेकर तंज कसा।

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    रक्षा मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव सुधार और युवाओं के भविष्य की बात होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष पर उन्होंने इन मुद्दों की आड़ में सत्ता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। हालांकि, सत्ता परिवर्तन को लेकर लगाए गए उनके आरोप विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक बयान हैं।

     ‘रिजीम चेंज’ के बयान पर विपक्ष को घेरा

    राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

    रक्षा मंत्री के मुताबिक, युवाओं को राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता से जोड़ने के बजाय देश के विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आंदोलनों के जरिए सरकार पर दबाव बनाने और किसी भी तरह सत्ता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

      राहुल गांधी से रायबरेली सीट को लेकर सवाल

    राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की रायबरेली सीट को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना यह सीट जीत सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। राजनाथ सिंह ने इसकी वजह ‘वोट चोरी’ नहीं, बल्कि पार्टी के कामकाज को बताया। राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को बड़ा खुलासा बताया जा रहा था, वह उनके मुताबिक प्रभावी साबित नहीं हुआ।

    रक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर अदालत में औपचारिक अपील नहीं की। यह दावा भी उनके बयान के रूप में सामने आया है।

     चुनाव आयोग के इतिहास का किया जिक्र

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने चुनाव आयोग की नियुक्तियों और उसके कामकाज को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाए। उन्होंने 1993 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, नवीन चावला से जुड़े विवाद और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल के बाद में मंत्री बनने का जिक्र किया।

    उन्होंने दावा किया कि मतदाता पहचान पत्र लागू होने के बाद कांग्रेस के लिए चुनावों में बहुमत हासिल करना मुश्किल हुआ। राजनाथ सिंह ने राजीव गांधी की हत्या के बाद चुनाव स्थगित किए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाए। ये टिप्पणियां चुनाव आयोग और कांग्रेस के ऐतिहासिक संबंधों को लेकर उनकी राजनीतिक दलीलों का हिस्सा थीं।

     कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और पुराने मुद्दों पर भी निशाना

    लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में नेताओं के समर्थकों के बीच हुई कथित मारपीट को लेकर भी रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर ही भरोसे की कमी दिखाई देती है।

    राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े आपातकाल, 1984 के सिख विरोधी दंगों और 1990 में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने और सड़क के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया।

    राजनाथ सिंह के बयान के साथ ही कांग्रेस और विपक्ष की राजनीति को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज होने की संभावना है। उनके आरोपों और दावों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया इस विवाद का अहम पहलू होगी।

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