Last updated: October 17th, 2026 at 06:51 am

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन को लेकर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए प्रदर्शनकारियों से अपील की कि विरोध जताते समय आम लोगों को परेशानी न हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाया जाए। राघव चड्ढा ने कहा कि लोकतंत्र में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। कानून का सम्मान और शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रही CJP
कॉकरोच जनता पार्टी का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर देशभर में मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रही है।
इसी दौरान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के बावजूद CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका वहां पहुंच गए। दोनों ने तिरंगा लहराते हुए नारेबाजी की। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
अभिजीत दीपके ने किया था तिरंगा मार्च का आह्वान
अपने साथियों की गिरफ्तारी के विरोध में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च बुलाया था। उन्होंने लोगों से शाम पांच बजे दिल्ली के सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर जुटने की अपील की थी।
मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने दावा किया कि दीपके को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें एसईएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दीपके को कहां रखा गया है, इसकी जानकारी नहीं दी गई और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति भी नहीं मिल रही है।
छह दिन में दूसरी बार हिरासत में लिए गए दीपके
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अभिजीत दीपके को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/170 के तहत हिरासत में लिया गया है। पिछले छह दिनों में यह दूसरी बार है, जब उन्हें हिरासत में लिया गया।
इससे पहले 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उन्हें विमान से हिरासत में लिया गया था। अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया था। वहीं, CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की एक अदालत ने दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था। उन्हें 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
कनॉट प्लेस में कारोबार प्रभावित होने का दावा
CJP के प्रदर्शन और सुरक्षा प्रतिबंधों से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि प्रदर्शन या सुरक्षा पाबंदियों के कारण कारोबारियों को नुकसान हुआ है, तो मुआवजे के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
कारोबारियों की ओर से पेश अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राय ने दावा किया कि विरोध-प्रदर्शनों के कारण कनॉट प्लेस में प्रतिदिन करीब 250 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के उस फैसले से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसके तहत प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आजीविका के अधिकार पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और स्टॉल लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों की आजीविका को भी महत्वपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि यदि विरोध-प्रदर्शनों या सुरक्षा प्रतिबंधों से कारोबार को नुकसान पहुंचता है, तो वह अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के तहत आवश्यक निर्देश दे सकती है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि अलग-अलग लोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल करना चाहते हैं—कोई विरोध करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचकर आजीविका कमाना चाहता है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। ऐसे मामलों में इन सभी हितों के बीच संतुलन जरूरी है।
CJP के प्रदर्शन, नेताओं की हिरासत और कारोबार प्रभावित होने के दावों के बीच यह मामला अब राजनीतिक विरोध के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और आम लोगों की आजीविका से जुड़े सवालों को सामने ला रहा है।
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