Last updated: October 17th, 2026 at 06:54 am
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल पर विवाद खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आरोप लगाया है कि शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को जबरन कैंपस से बाहर निकाल दिया। संगठन का दावा है कि इस दौरान छात्रों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार भी किया गया। AISA के मुताबिक, हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को बाद में रिहा कर दिया गया।
सुबह 5:30 बजे कार्रवाई का आरोप
AISA के अनुसार, छात्र पिछले पांच दिनों से छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। संगठन का आरोप है कि शनिवार सुबह करीब 5:30 बजे चीफ प्रॉक्टर असद मलिक के निर्देश पर छात्रों को हटाने की कार्रवाई की गई।
AISA ने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान कैंपस की लाइटें बंद कर दी गईं और छात्रों को घसीटकर बाहर निकाला गया। संगठन के मुताबिक, इस दौरान कई छात्र घायल हुए और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। AISA ने इस कार्रवाई को छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।
हालांकि, इन आरोपों पर जामिया प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। ऐसे में घटना के पूरे घटनाक्रम और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
छात्रों के निलंबन और निष्कासन पर भी विवाद
AISA का कहना है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को कैंपस से हटाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की। संगठन के मुताबिक, कुछ छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित किया गया है, जबकि कुछ को पूरे शैक्षणिक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
छात्र संगठन ने इन फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन को छात्रों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए थी। AISA का आरोप है कि संवाद के बजाय कार्रवाई और सजा का रास्ता अपनाया गया।
AISA ने प्रशासन के सामने रखीं चार मांगें
मामले को लेकर AISA ने विश्वविद्यालय प्रशासन से चार प्रमुख मांगें की हैं। संगठन ने चीफ प्रॉक्टर असद मलिक के तत्काल इस्तीफे और छात्रों के निलंबन व निष्कासन के आदेश बिना शर्त वापस लेने की मांग की है।
इसके अलावा, AISA ने जामिया छात्र संघ को बहाल करने और छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग उठाई है। संगठन ने छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार की स्वतंत्र जांच कराने तथा इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की है।
AISA का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। फिलहाल विवाद का केंद्र छात्र संघ की बहाली, प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और अनुशासनात्मक आदेशों को लेकर बना हुआ है। आगे की स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और मामले में होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
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