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बिहार में हत्याओं पर मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा का बयान विवादों में, चिराग पासवान ने भी जताई असहमति

  बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर जारी बहस के बीच राज्य सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा अपने एक बयान
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    बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर जारी बहस के बीच राज्य सरकार के मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा अपने एक बयान के कारण राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। भोजपुर जिले में लगातार हुई गोलीबारी और हत्या की घटनाओं पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि बिहार बहुत बड़ा राज्य है और यहां हत्याएं होती रहती हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दल के नेता चिराग पासवान ने भी असहमति जताई। बयान को लेकर राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है।

     

    यह विवाद भोजपुर जिले के आरा में सेवानिवृत्त सीमा शुल्क अधिकारी राम कुमार सिंह की हत्या के बाद शुरू हुआ। 15 अक्टूबर 2026 को सुबह की सैर पर निकले राम कुमार सिंह को मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी। घटना जैन कॉलेज के पास कनकपुरी इलाके में हुई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें आरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इस वारदात के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठी।

     

    राम कुमार सिंह पूर्व सहायक सीमा शुल्क आयुक्त थे और सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हुए थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलावरों ने उन पर कई गोलियां चलाईं और वारदात के बाद फरार हो गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। परिवार की ओर से जमीन विवाद सहित कुछ संभावित कारणों की आशंका जताई गई, लेकिन हत्या के पीछे वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

     

    इसी दौरान भोजपुर जिले के पवना क्षेत्र में भी एक युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार रात मेला देखने गए शांतनु कुमार पर बाइक सवार हमलावरों ने गोली चलाई थी। दो दिनों के भीतर हुई इन घटनाओं को लेकर पत्रकारों ने मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा से राज्य में बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल किए।

     

    मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि भोजपुर में ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं और अलग-अलग हत्याओं के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उन्हें घटनाओं की पृष्ठभूमि का पता लगाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पुलिस का सूचना तंत्र काम कर रहा है और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उनके इस बयान का वह हिस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने कहा कि इतने बड़े बिहार में हत्याएं होती रहती हैं और इस पर क्या किया जा सकता है।

     

    मंत्री की टिप्पणी को कई लोगों ने गंभीर अपराधों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया। आलोचकों का कहना है कि जब किसी परिवार ने अपने सदस्य को हिंसक घटना में खोया हो, तब सरकार के प्रतिनिधियों से संवेदना जताने और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कराने का भरोसा देने की अपेक्षा की जाती है। उनके अनुसार, अपराध की घटनाओं को सामान्य बताने वाला बयान जनता के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा सकता है।

     

    विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी भगवान सिंह कुशवाहा के बयान से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार का हिस्सा होने के नाते मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। किसी आपराधिक घटना पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी का समर्थन नहीं किया जा सकता। चिराग की प्रतिक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनकी पार्टी बिहार में एनडीए की सहयोगी है।

     

    विपक्षी नेताओं ने भी राज्य सरकार से कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर जवाब मांगा है। आलोचकों ने कहा कि सरकार को अपराधियों की गिरफ्तारी, मामलों की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, मंत्री के समर्थकों का पक्ष है कि उन्होंने घटनाओं के पीछे के कारणों की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया था और पुलिस कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया था।

     

    राम कुमार सिंह और शांतनु कुमार की हत्या के मामलों में पुलिस जांच जारी है। आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी और घटनाओं के पीछे की वजह का पता लगाना जांच एजेंसियों के सामने प्रमुख चुनौती है। मंत्री के बयान ने बिहार में अपराध और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित मामलों में पुलिस कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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