Last updated: October 23rd, 2026 at 03:11 pm
बिहार के गया जिले में दारोगा के बेटे रानू सिंह की हत्या के मामले में पुलिस ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बड़ी कार्रवाई की। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भिक्षा गांव के पास देर रात पुलिस और आरोपियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें दो मुख्य आरोपी गोली लगने से घायल हो गए। दोनों की पहचान श्याम बिहारी उर्फ गौरव और गौरव उर्फ काला के रूप में बताई गई है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर इलाज के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया। इस कार्रवाई के बाद चर्चित हत्याकांड की जांच में तेजी आने की उम्मीद है।
यह मामला 19 अक्टूबर की रात गया के मानपुर इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। सिद्धार्थपुरी कॉलोनी में नौरंगा आहर के पास अपराधियों ने दारोगा सुधांशु शेखर उर्फ पिंटू सिंह के दो बेटों को गोली मार दी थी। इस हमले में छोटे बेटे रानू सिंह की मौत हो गई, जबकि उनके बड़े भाई मोनू सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया और इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए गया पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान शुरू किया था। पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि मामले के कुछ आरोपी मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भिक्षा गांव के आसपास मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम वहां पहुंची। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कार्रवाई के दौरान गोलीबारी की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों घायल हो गए।
मुठभेड़ में घायल दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी। पुलिस ने उन्हें कब्जे में लेने के बाद अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद होने की भी खबर है। पुलिस अब बरामद सामान की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या में किन हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने मुठभेड़ की पुष्टि की है।
इस मामले में पुलिस पहले भी कुछ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दोनों भाइयों पर हमला करने की योजना कैसे बनाई गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि घटना के पीछे पुरानी रंजिश, किसी विवाद या किसी अन्य कारण की भूमिका थी या नहीं। शुरुआती रिपोर्टों में पुराने विवाद से जुड़ी आशंका जताई गई है, लेकिन वारदात का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दोनों भाइयों को घटना वाली रात किस परिस्थिति में घटनास्थल पर बुलाया गया था। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें फोन करके मौके पर बुलाए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, इस घटनाक्रम की पूरी पुष्टि और आरोपियों की भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
गया में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। किसी पुलिसकर्मी के परिवार के सदस्यों पर इस तरह का हमला होना कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला माना जा रहा है। घटना के बाद पुलिस पर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने और पूरे मामले का खुलासा करने का दबाव था। दो मुख्य आरोपियों के घायल अवस्था में पकड़े जाने से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पुलिस उनसे पूछताछ करने के साथ-साथ घटना से जुड़े अन्य संदिग्धों और संभावित साजिश की कड़ियों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई मेडिकल स्थिति, पूछताछ और जांच से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस पूरे हत्याकांड की वजह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का खुलासा कब तक करती है।
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