Last updated: October 25th, 2026 at 04:17 am

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र आंदोलन तेज होने और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों के बीच टकराव की स्थिति बनने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन कराने का फैसला लिया है। 24 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, ऑनलाइन पढ़ाई तत्काल प्रभाव से शुरू की गई और अगले आदेश तक जारी रहेगी। प्रशासन ने यह कदम परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पढ़ाई को जारी रखने के उद्देश्य से उठाया है।
विश्वविद्यालय में यह विरोध प्रदर्शन 12 अक्टूबर से चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ की बहाली और छात्र संघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में छात्र संघ को वर्ष 2006 में भंग कर दिया गया था। इसके बाद से यहां नियमित निर्वाचित छात्र संघ की व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है। छात्रों का कहना है कि लंबे समय से निर्वाचित प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण उनकी मांगों और समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर सीमित हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान पांच छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में छात्र संघ चुनाव की समयसीमा घोषित करना, मुख्य प्रॉक्टर को हटाना और आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन इन मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रह सकता है।
24 अक्टूबर को परिसर में तनाव उस समय बढ़ गया, जब विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों ने प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए तंबुओं को हटाने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की होने की खबर सामने आई। कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति दिखाई दी। हालांकि, इन वीडियो की सभी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की और प्रदर्शन स्थल से तंबू हटाए। संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई बातचीत की प्रक्रिया के बीच की गई। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि उसने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करके आंदोलन समाप्त करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने का प्रयास किया था। प्रशासन के अनुसार, स्थिति को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया था।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने छात्र संघ चुनाव की मांग पर कहा कि छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित की गई है। प्रशासन का तर्क है कि चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले संविधान और चुनाव कराने की व्यवस्था पर काम पूरा करना जरूरी है। छात्रों ने इस प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा मांगी है, ताकि चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालने की आशंका दूर हो सके।
इस बीच, परिसर की दीवारों पर लिखे गए कुछ विवादित नारों को लेकर भी विवाद सामने आया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन नारों की निंदा की और मामले में पुलिस से शिकायत करने की बात कही। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विवादित नारों से जुड़े आरोपों को लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं। इस प्रकरण की जिम्मेदारी किसकी है, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं; इसलिए जांच के निष्कर्ष आने से पहले किसी पक्ष को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
ऑनलाइन कक्षाओं के आदेश के बाद विश्वविद्यालय ने शिक्षकों, विभागाध्यक्षों और विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, परिसर में नियमित कक्षाएं दोबारा कब शुरू होंगी, इसकी निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने विभागों से मिलने वाले निर्देशों और विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें।
जामिया में जारी विवाद अब छात्र प्रतिनिधित्व, परिसर की सुरक्षा और प्रशासन तथा विद्यार्थियों के बीच संवाद जैसे महत्वपूर्ण सवालों से जुड़ गया है। फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई जारी रखने की व्यवस्था की गई है, जबकि छात्र संघ चुनाव और अन्य मांगों पर समाधान निकालने की चुनौती विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने बनी हुई है।
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