Last updated: October 25th, 2026 at 11:54 am

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अहम बातें कही हैं। जस्टिस कौल के मुताबिक, कॉलेजियम की औपचारिक बैठक में नामों पर विचार होने से पहले ही सरकार के साथ संभावित नियुक्तियों पर चर्चा करने की प्रथा रही है। उन्होंने इस तरीके पर आपत्ति जताई थी। उनके बयान के बाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नियुक्तियों में सरकार की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस कौल ने अपनी आगामी किताब Without Fear or Favour में भी इस घटना का उल्लेख किया है। वहीं, द वायर को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने किताब में दर्ज घटनाक्रम के बारे में विस्तार से बात की।
कॉलेजियम की बैठक से पहले सरकार से चर्चा का सवाल
जस्टिस कौल के मुताबिक, कॉलेजियम की एक बैठक के दौरान तत्कालीन CJI डीवाई चंद्रचूड़ उन्हें अलग से बातचीत के लिए ले गए थे। इस दौरान चंद्रचूड़ ने उनसे पूछा था कि क्या प्रस्तावित नियुक्तियों के नामों पर सरकार की राय जानने के लिए उसे फोन किया जाना चाहिए।
जस्टिस कौल ने बताया कि उन्होंने इस विचार का विरोध किया। उनका कहना था कि कॉलेजियम की बैठक में नामों पर विचार-विमर्श के दौरान सरकार से पहले ही चर्चा करना उचित नहीं है।
उनके अनुसार, कॉलेजियम पांच नामों पर सहमत हो चुका था, लेकिन आखिरी समय में सामने आए छठे नाम को भी मंजूरी देने का प्रस्ताव था। जस्टिस कौल और कॉलेजियम के कुछ अन्य सदस्य इस अतिरिक्त नाम को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं थे।
जस्टिस कौल ने आशंका जताई कि संभव है कि अन्य नामों, छठे नाम समेत, को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की सहमति लेने की कोशिश की गई हो। हालांकि, उनके इस बयान को सरकार से मंजूरी लिए जाने के प्रमाण के तौर पर नहीं, बल्कि उनके संदेह और अनुभव के रूप में देखा जाना चाहिए।
‘सरकार से सलाह लेना और पहले मंजूरी लेना अलग बातें’
जस्टिस कौल ने स्पष्ट किया कि वह न्यायाधीशों की नियुक्ति के मुद्दे पर सरकार से बातचीत करने के विरोधी नहीं हैं। उनकी आपत्ति बातचीत के समय और तरीके को लेकर थी। उनके मुताबिक, कॉलेजियम की औपचारिक बैठक और विचार-विमर्श से पहले ही नामों पर चर्चा करने की परंपरा चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह तरीका चंद्रचूड़ से पहले भी अपनाया जाता था और उनके बाद भी जारी रहा। जस्टिस कौल ने इस प्रथा पर अपनी असहजता जाहिर की।
चंद्रचूड़ की न्यायिक और प्रशासनिक भूमिका पर क्या कहा?
इंटरव्यू के दौरान जब जस्टिस कौल से पूछा गया कि क्या वह डीवाई चंद्रचूड़ को कमजोर मुख्य न्यायाधीश मानते हैं, तो उन्होंने न्यायिक और प्रशासनिक भूमिकाओं में अंतर किया। जस्टिस कौल ने कहा कि चंद्रचूड़ की न्यायिक भूमिका को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं थी। उन्होंने उनकी बौद्धिक क्षमता, योग्यता और मेहनत करने की क्षमता का उल्लेख किया। हालांकि, प्रशासनिक मामलों में सरकार के साथ जरूरत से ज्यादा चर्चा किए जाने को लेकर उन्होंने अपनी आपत्ति रखी।
PMLA मामले में बेंच बदलने पर भी उठाए सवाल
जस्टिस कौल ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े एक मामले का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के कुछ पहलुओं पर पुनर्विचार किए जाने का सवाल उठाया था। इसके बाद मामला उनसे चर्चा किए बिना दूसरी पीठ के सामने भेज दिया गया।
जस्टिस कौल ने इस घटनाक्रम को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, न्यायाधीशों की नियुक्ति से लेकर संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली पीठ में बदलाव तक, ऐसे घटनाक्रम न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करते हैं।
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जस्टिस कौल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उनकी किताब में दर्ज घटनाएं मोदी सरकार के कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
जयराम रमेश ने न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार की कथित भूमिका, कॉलेजियम की बैठक से पहले मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय के एक न्यायाधीश के नाम पर उनकी जाति को लेकर सरकार की ओर से सवाल पूछे जाने का भी जिक्र किया।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, जस्टिस कौल ने उन घटनाओं को संयमित शब्दों में दर्ज किया है, जिन पर आम तौर पर खुलकर चर्चा नहीं होती। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्षों का जवाब अलग से देखना जरूरी है।
जस्टिस कौल के बयानों ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम की भूमिका, सरकार के साथ उसके संवाद और न्यायपालिका की संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
![]()
Comments are off for this post.