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इजरायल में सत्ता की चाबी किसके हाथ? नेतन्याहू और आइजेनकोट के बीच मुकाबला, अरब पार्टियां बनेंगी निर्णायक?

इजरायल के 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के नतीजों ने सरकार गठन की तस्वीर उलझा दी है। प्रधानमंत्री
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इजरायल के 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के नतीजों ने सरकार गठन की तस्वीर उलझा दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं, दो अरब पार्टियों ने मिलकर 19 सीटें जीती हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा किसी भी खेमे के पास अपने दम पर नहीं है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अरब पार्टियां किसे समर्थन देती हैं और विपक्ष उनके साथ मिलकर सरकार बनाने पर सहमत हो पाता है या नहीं। <Cite refs=

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    अरब पार्टियों के पास 19 सीटें, बन सकती हैं निर्णायक

    इजरायल की संसद यानी केनेसट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। चुनाव के नतीजों में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं।

    अरब नेतृत्व वाली दो पार्टियों- जॉइंट लिस्ट और राम (Ra’am) ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं। इनमें जॉइंट लिस्ट के पास 11 और राम के पास 8 सीटें हैं। अगर दोनों पार्टियां विपक्षी खेमे का समर्थन करती हैं तो 48 और 19 को मिलाकर आंकड़ा 67 तक पहुंच सकता है। यह बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से ज्यादा है।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विपक्ष को इन सभी सीटों का समर्थन मिलना तय है। दोनों अरब पार्टियों के बीच भी बातचीत और समर्थन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक स्थितियां हो सकती हैं।

    विपक्ष के भीतर ही अरब पार्टियों के समर्थन पर मतभेद

    नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होना होगा, लेकिन अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर विपक्ष के भीतर मतभेद हैं।

    नफ्ताली बेनेट की पार्टी बी’याचद और एविग्डोर लिबरमैन की यिसरायल बेतेनु ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था। वहीं, डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान अरब पार्टियों के साथ सहयोग के पक्ष में हैं।

    ऐसे में विपक्ष के सामने दोहरी चुनौती है। उसे एक तरफ सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाना है, तो दूसरी तरफ अपने ही गठबंधन के उन नेताओं को साथ रखना है जो अरब पार्टियों के समर्थन के खिलाफ हैं।

    क्या चुनाव के बाद गठबंधन बदल सकती हैं पार्टियां?

    इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था में चुनाव से पहले बने गठबंधन और चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए होने वाला समझौता अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। पार्टियां चुनाव के बाद नए राजनीतिक समीकरण बना सकती हैं और दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश कर सकती हैं।

    इसलिए चुनाव से पहले किसी पार्टी का गठबंधन में होना यह जरूरी नहीं बनाता कि वह चुनाव के बाद भी उसी खेमे के साथ रहे। सरकार गठन के लिए अलग-अलग दलों के बीच बातचीत और समझौते अहम होते हैं।

    क्या सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जा सकता है?

    इजरायल में सांसदों के दल-बदल को नियंत्रित करने के लिए कानून है। 1991 में बेसिक लॉ: द केनेसट में धारा 6A जोड़ी गई थी। इसके तहत कोई सांसद अपनी संसदीय पार्टी से अलग होता है और संसद की सदस्यता से इस्तीफा नहीं देता, तो उस पर कई प्रतिबंध लग सकते हैं।

    ऐसे सांसद को मौजूदा केनेसट के कार्यकाल में किसी दूसरी संसदीय पार्टी में शामिल होने से रोका जा सकता है। वह उसी कार्यकाल में मंत्री या उप-मंत्री भी नहीं बन सकता। इसके अलावा, अगले चुनाव में ऐसी पार्टी की उम्मीदवार सूची से चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है, जिसका प्रतिनिधित्व मौजूदा केनेसट में रहा हो। हालांकि, कानून के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले सामूहिक विभाजन को छूट मिल सकती है।

    क्या पार्टी छोड़ने पर सांसद की सदस्यता खत्म हो जाती है?

    नहीं, केवल पार्टी छोड़ने से सांसद की संसद सदस्यता अपने आप खत्म नहीं होती। वह सांसद स्वतंत्र सदस्य के रूप में अपनी सीट बनाए रख सकता है, लेकिन उस पर दल-बदल कानून के तहत प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी पार्टी का चुनाव के बाद गठबंधन बदलना और किसी सांसद का अपनी संसदीय पार्टी छोड़ना दो अलग-अलग मामले हैं। दोनों पर एक जैसे नियम लागू नहीं होते।

    अब किसके हाथ में होगी सरकार गठन की जिम्मेदारी?

    इजरायल के चुनाव परिणामों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की भूमिका के साथ आगे बढ़ेगी। राष्ट्रपति विभिन्न संसदीय दलों के प्रतिनिधियों से सलाह-मशविरा करने के बाद किसी सांसद को सरकार बनाने का मौका देंगे।

    फिलहाल चुनावी नतीजों ने नेतन्याहू और आइजेनकोट, दोनों के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती खड़ी कर दी है। अरब पार्टियों के 19 सांसदों का समर्थन, विपक्ष के भीतर सहमति और संभावित नए राजनीतिक समझौते सरकार गठन की दिशा तय कर सकते हैं। यदि बातचीत नाकाम रहती है तो इजरायल में एक और चुनाव की नौबत भी आ सकती है।

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