Last updated: November 2nd, 2026 at 01:07 pm

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी सामने आने के बाद दो तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। निलंबित अधिकारियों की पहचान मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के रूप में हुई है। दोनों अधिकारी पीलीभीत में एसडीएम के पद पर तैनात थे और मतदाता सूची तैयार करने तथा उसमें संशोधन की प्रक्रिया से जुड़े थे।
आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को भेजे गए पत्र में कहा है कि दोनों अधिकारियों के आरोपपत्र आयोग को जांच के लिए उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि आयोग की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें बहाल नहीं किया जाएगा। यह कार्रवाई पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच के बाद की गई है।
जांच में सामने आया कि 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच मतदाता विवरण में संशोधन के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 आवेदन ऑनलाइन दर्ज किए गए थे। इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त किए गए। हालांकि, इन आवेदनों से संबंधित भौतिक फॉर्म और जरूरी दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाए गए। इसी कारण संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन पर सवाल उठे।
मामले में मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कंप्यूटर सहायक ने निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेजों के बिना मतदाता विवरण में संशोधन से जुड़े आवेदन दर्ज किए। इस मामले में पहले ही दोनों अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। अब निर्वाचन आयोग ने संबंधित एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने की संभावना पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह धारा सार्वजनिक सेवक द्वारा कानून के निर्देशों की अवहेलना से संबंधित है।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने को भी कहा है। इसके अलावा पीलीभीत जिले की सभी चार विधानसभा सीटों की मतदाता सूची की जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने को कहा है। इन अधिकारियों के संबंध में कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्यभर के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कार्यालयों में कार्यरत कंप्यूटर सहायकों की ECINET पोर्टल लॉगिन आईडी निष्क्रिय करने का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को सुरक्षित करना और किसी भी संभावित अनियमितता को रोकना है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने क्षेत्र में मतदाता सूची की जांच कराने तथा कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पीलीभीत की मतदाता सूची का मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, अभी तक जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं और आरोपों की कानूनी पुष्टि होना बाकी है।
निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई के बाद अब पूरे प्रदेश में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की निगरानी और सख्त होने की संभावना है। विशेष रूप से फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, नाम हटाने और विवरण में संशोधन करने की प्रक्रिया की जांच पर जोर दिया जाएगा। आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
पीलीभीत का यह मामला उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के सत्यापन और चुनावी प्रशासन की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई से इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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