Last updated: November 2nd, 2026 at 01:09 pm

बिहार की राजनीति में विपक्ष की महारैली और निर्दलीय जनप्रतिनिधियों के भाजपा में शामिल होने का मुद्दा गरमाता जा रहा है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई विपक्ष की महारैली को सत्ता पक्ष की ओर से फ्लॉप बताए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि रैली में उमड़ी भीड़ की सच्चाई किसी से छिपी नहीं है। जिन्हें इसे असफल बताना है, वे ऐसा कहते रहें।
राहुल गांधी की रैली में उमड़ी भीड़ का किया जिक्र
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान मुकेश सहनी ने दावा किया कि 1974 के बाद रामलीला मैदान में राहुल गांधी के नेतृत्व में इतनी बड़ी संख्या में लोग कभी नहीं जुटे थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश की जनता और लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होकर काम कर रहा है। यह किसी व्यक्ति का निजी एजेंडा नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का प्रयास है।
सहनी के मुताबिक, रैली को लेकर भ्रम फैलाने या उसे फ्लॉप बताने से कोई फर्क नहीं पड़ता। जनता की भागीदारी ने अपना संदेश दे दिया है।
पैसे से सांसद खरीदने के आरोप पर उठाए सवाल
वीआईपी प्रमुख ने चुनाव और लोकतंत्र में धनबल के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव जनता के लिए होते हैं और जनता के वोट की अहमियत बनी रहनी चाहिए। अगर पैसे के दम पर सांसद और विधायक खरीदे जाने लगेंगे, तो आम लोगों की आवाज कौन सुनेगा?
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक सांसद को 100 करोड़ रुपये देकर खरीदा जाए, तो 250 सांसदों के लिए 25 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। वहीं, प्रति सांसद 500 करोड़ रुपये के हिसाब से 500 सांसदों के लिए एक लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। सहनी ने सवाल किया कि जिस व्यक्ति के पास इतनी संपत्ति हो, उसके लिए देश की राजनीति को प्रभावित करना कितना मुश्किल रह जाएगा?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे महत्वपूर्ण है और विपक्ष इसी अधिकार को सुरक्षित रखने की लड़ाई लड़ रहा है। सहनी ने जनता से अपील की कि उसे अपने मताधिकार का महत्व समझना चाहिए।
निर्दलीय जीतकर BJP में जाने पर भी जताई नाराजगी
मुकेश सहनी ने हाल ही में निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए जनप्रतिनिधियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन उम्मीदवारों को विपक्ष के समर्थन में वोट दिया था, उनका चुनाव जीतने के बाद दूसरी पार्टी में चले जाना जनादेश का अपमान है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और अदालत को अपना फैसला देना है। सहनी के मुताबिक, मतदाताओं ने जिस राजनीतिक सोच के आधार पर अपना समर्थन दिया, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
BJP पर गठबंधन धर्म नहीं निभाने का लगाया आरोप
भाजपा पर निशाना साधते हुए सहनी ने आरोप लगाया कि पार्टी को गठबंधन के सिद्धांतों और सहयोगियों के भरोसे से ज्यादा सत्ता की चिंता है। उन्होंने कहा कि भाजपा का गठबंधन धर्म दो तरह का है। सामने से साथ रहने की बात करती है, जबकि पीछे से सहयोगियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है।
सहनी ने दावा किया कि भाजपा ने उनके साथ भी ऐसा व्यवहार किया और दूसरे सहयोगी दलों के साथ भी यही रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले ही पैसे और दूसरे तरीकों से अपना काम किया और चुनाव जीतने के बाद संबंधित जनप्रतिनिधि उसके साथ चले गए।
उन्होंने सवाल किया कि अगर इन प्रतिनिधियों को भाजपा के साथ ही जाना था, तो उन्हें चुनाव से पहले ही उसके साथ रहना चाहिए था। सहनी ने कहा कि राजनीतिक गठबंधन में पारदर्शिता और भरोसा जरूरी है तथा जनता के जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए।
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