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तेजस्वी यादव ने नौकरी के मुद्दे पर NDA को घेरा, 1.20 लाख नियुक्ति पत्र बांटने का दिन याद कर सरकार से पूछे सवाल

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर एनडीए सरकार को निशाने पर लिया है।
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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर एनडीए सरकार को निशाने पर लिया है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की चर्चित रचना ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां साझा करते हुए उन्होंने महागठबंधन सरकार के कार्यकाल में हुई शिक्षक बहाली और नियुक्ति पत्र वितरण का जिक्र किया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के दौरान युवाओं को रोजगार देने की रफ्तार प्रभावित हुई है।

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    तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में ‘रश्मिरथी’ की ये पंक्तियां लिखीं—

    “मैं गरुड़ कृष्ण मैं पक्षिराज,

    सिर पर ना चाहिए मुझे ताज!

    रण-खेत पाटना है मुझको,

    अहिपाश काटना है मुझको!”

    इसके बाद उन्होंने 2 नवंबर 2023 को बिहार के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि पटना के गांधी मैदान में एक साथ 1 लाख 20 हजार 336 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। तेजस्वी ने इसे सरकारी नौकरी के क्षेत्र में देश का बड़ा आयोजन बताया।

    10 लाख सरकारी नौकरियों के वादे का किया जिक्र

    तेजस्वी यादव ने 2020 के विधानसभा चुनाव को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने राजद की सरकार बनने पर 10 लाख पक्की सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था। उनका दावा है कि यह घोषणा वैज्ञानिक आंकड़ों और योजना के आधार पर की गई थी।

    उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस वादे पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियों के लिए वेतन का पैसा कहां से आएगा। तेजस्वी के मुताबिक, उस समय कई न्यूज चैनलों पर भी इस वादे को अव्यावहारिक बताया गया था।

    उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में सरकारी तंत्र और पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग कर उन्हें मामूली अंतर से सत्ता में आने से रोक दिया गया।

    महागठबंधन सरकार में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने का दावा

    तेजस्वी यादव के अनुसार, वर्ष 2022 में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद उन्होंने युवाओं को रोजगार देने के वादे को पूरा करने की शर्त पर नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन दिया और उपमुख्यमंत्री बने।

    उन्होंने बताया कि सरकार बनने के कुछ महीनों के भीतर शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-1 और TRE-2 के नोटिफिकेशन जारी किए गए। तेजस्वी का दावा है कि परीक्षाएं पेपर लीक के बिना कराई गईं और परिणाम भी समय पर घोषित हुए। इसके बाद बीपीएससी के माध्यम से तीन लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई।

    तेजस्वी ने 2 नवंबर 2023 को गांधी मैदान में हुए नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय खुद लेने के बजाय तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिया था।

    स्वास्थ्य विभाग में 1.30 लाख पदों पर बहाली की थी तैयारी

    नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि शिक्षक नियुक्ति 10 लाख सरकारी नौकरियां देने की योजना का शुरुआती हिस्सा थी। उनके अनुसार, दूसरे विभागों में भी बहाली की तैयारी की जा रही थी और इसके लिए आंकड़े तथा ब्लूप्रिंट तैयार थे।

    उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य विभाग का उल्लेख करते हुए कहा कि पब्लिक हेल्थ कैडर के तहत 1 लाख 30 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति की योजना बनाई गई थी। तेजस्वी का आरोप है कि इस संबंध में तैयार फाइल को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे नहीं बढ़ने दिया।

    नीतीश के पाला बदलने के बाद रोजगार योजनाएं प्रभावित होने का आरोप

    तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर एनडीए के साथ सरकार बना ली। इससे युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी कई योजनाओं पर असर पड़ा।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कड़ाके की ठंड में पानी की बौछारें डाली गईं।

    तेजस्वी यादव ने अपने बयान के जरिए मौजूदा एनडीए सरकार से रोजगार के मुद्दे पर सवाल किए हैं। उन्होंने महागठबंधन सरकार के दौरान शुरू हुई नियुक्ति प्रक्रियाओं को याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि युवाओं को सरकारी नौकरी देने की दिशा में आगे की योजनाएं पूरी नहीं हो सकीं।

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