Last updated: November 2nd, 2026 at 01:19 pm

मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर कानूनी और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बिहार विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी समाप्त करने की मांग पर नोटिस जारी किया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर भेजे गए इस नोटिस में अनंत सिंह को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है।
जेडीयू की शिकायत पर जारी हुआ नोटिस
दरअसल, जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अनंत सिंह पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। पार्टी की शिकायत मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें जवाब देने का अवसर दिया है।
जेडीयू का आरोप है कि विधान परिषद चुनाव के दौरान अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया था। पार्टी के मुताबिक, उन्होंने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया। इसके अलावा उन पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया गया है।
24 अक्टूबर को छह साल के लिए पार्टी से हुए थे निष्कासित
इन आरोपों के बाद जेडीयू ने 24 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दलबदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी।
अब अनंत सिंह के जवाब पर टिका फैसला
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के मुताबिक, अनंत सिंह सात दिनों के भीतर लिखित जवाब दे सकते हैं या फिर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। उनका जवाब मिलने के बाद जेडीयू की ओर से दिए गए दस्तावेजों और सबूतों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही उनकी विधायकी को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पत्नी नीलम देवी से भी वापस लिया गया राज्य मंत्री का दर्जा
अनंत सिंह की मुश्किलें केवल विधानसभा सदस्यता तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में उनकी पत्नी नीलम देवी से राज्य मंत्री का दर्जा वापस ले लिया गया था। साथ ही उन्हें सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस भी दिया गया है।
इसके अलावा दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। फिलहाल सबकी नजरें अनंत सिंह की ओर से दिए जाने वाले जवाब और विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।
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