Last updated: November 7th, 2026 at 03:05 pm

वाराणसी में भारत रत्न और प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुश्तैनी मकान के एक हिस्से को गिराए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कलाकारों की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। वहीं, वाराणसी नगर निगम और बिस्मिल्लाह खान के परिवार ने स्पष्ट किया है कि मकान को किसी सरकारी बुलडोजर कार्रवाई के तहत नहीं गिराया जा रहा है, बल्कि परिवार स्वयं जर्जर भवन का पुनर्निर्माण करा रहा है।
अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मकान के एक हिस्से को गिराए जाने से संबंधित वीडियो साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में भाजपा और उसकी विचारधारा पर कला एवं कलाकारों के प्रति संकीर्ण दृष्टिकोण रखने का आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि सकारात्मक कला समाज में सहृदयता और सहनशीलता को बढ़ावा देती है, लेकिन कुछ लोग इसे अपने राजनीतिक एजेंडे के रास्ते में बाधा मानते हैं।
सपा प्रमुख ने बिस्मिल्लाह खान की सांगीतिक विरासत को भारत की साझा सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि भारत रत्न से सम्मानित कलाकार की विरासत को नुकसान पहुंचाना देश के सम्मान को प्रभावित करने जैसा है। उन्होंने घोषणा की कि यदि समाजवादी पार्टी प्रदेश में सरकार बनाती है तो उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की सांगीतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए ‘श्रवण-संग्रहालय’ बनाया जाएगा।
हालांकि, इस मामले में वाराणसी नगर निगम ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज किया है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पुश्तैनी मकान काफी समय से जर्जर स्थिति में था। भवन की खराब हालत को लेकर पहले ही परिवार को नोटिस जारी किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि परिवार ने मकान के पुनर्निर्माण का निर्णय स्वयं लिया है और नगर निगम की ओर से कोई तोड़फोड़ नहीं की गई है।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि शहर की प्रमुख हस्तियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए निगम एक विशेष परियोजना पर काम कर रहा है। इसके तहत प्रसिद्ध व्यक्तियों के घरों तक जाने वाली सड़कों को उनके जीवन और योगदान के आधार पर विकसित करने तथा उनके आवासों के एक कमरे को संग्रहालय के रूप में तैयार करने की योजना है। इस परियोजना के अंतर्गत बिस्मिल्लाह खान के परिवार से भी बातचीत की गई थी, लेकिन परिवार ने नगर निगम के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी।
उधर, बिस्मिल्लाह खान के परिवार ने भी राजनीतिक आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि मकान पर सरकारी बुलडोजर नहीं चला है और भवन का पुनर्निर्माण परिवार के आपसी सहयोग से किया जा रहा है। परिवार के मुताबिक, पुराने मकान की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उसमें रहना और उसे सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया था। इसी कारण सभी संबंधित परिवारजन ने मिलकर पुनर्निर्माण का निर्णय लिया।
परिवार ने बताया कि नए भवन के भूतल पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का संग्रहालय बनाने की योजना है, जबकि पहली मंजिल पर परिवार के रहने की व्यवस्था होगी। संग्रहालय में उनकी सांगीतिक विरासत, स्मृतियों और उनसे जुड़ी वस्तुओं को संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा। परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण के लिए किसी प्रकार की सरकारी आर्थिक सहायता नहीं ली जा रही है।
पूरे मामले ने एक बार फिर वाराणसी में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को चर्चा में ला दिया है। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान भारतीय शास्त्रीय संगीत और शहनाई को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले महान कलाकारों में शामिल थे। उनकी विरासत को लेकर उठे इस विवाद के बीच परिवार का कहना है कि मकान का पुनर्निर्माण उसे नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
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