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अयोध्या में अब रामभक्तों पर गोलियां नहीं चलेंगी, ‘जय श्रीराम’ बोलने पर कोई लाठी नहीं चला सकेगा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अयोध्या में दीपावली मिलन समारोह के दौरान रामभक्तों की सुरक्षा,
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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अयोध्या में दीपावली मिलन समारोह के दौरान रामभक्तों की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां नहीं चलेंगी और ‘जय श्रीराम’ बोलने पर किसी पर लाठी-डंडे नहीं बरसाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचकोसी, 14 कोसी और 84 कोसी परिक्रमा पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकेगा। उन्होंने लोगों से संकल्प लेने की अपील की कि अयोध्या की गौरवशाली विरासत और धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

     

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को रामघाट हाल्ट के निकट स्थित निषाद बस्ती में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम अयोध्या में दसवें दीपोत्सव के एक दिन बाद आयोजित हुआ। शनिवार को अयोध्या में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया था, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने निषाद समाज, नाविकों, माझियों, सफाईकर्मियों और स्वच्छता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पार्षदों तथा कर्मचारियों को सम्मानित किया और दीपावली उपहार वितरित किए।

     

    योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अयोध्या के पुराने दौर और वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भगवान श्रीराम का नाम लेने पर भी लोगों को रोकने की कोशिश की जाती थी। रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलाने की घटनाएं हुई थीं। उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और अयोध्या में रामभक्तों का स्वागत किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक आस्था व्यक्त करने और पारंपरिक परिक्रमा करने के अधिकार को सुरक्षित रखना आवश्यक है।

     

    उन्होंने पंचकोसी, 14 कोसी और 84 कोसी परिक्रमा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन धार्मिक यात्राओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकेगा। मुख्यमंत्री ने इसे अयोध्या की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जोड़कर प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, अयोध्या केवल एक धार्मिक नगर नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है।

     

    मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में रामायण के प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने निषादराज, माता शबरी, वानर और भालू समाज के सहयोग से राक्षसी शक्तियों के खिलाफ संघर्ष किया था। उसी तरह आज अयोध्या के विकास में निषाद समाज, नाविकों, माझियों, सफाईकर्मियों और विभिन्न वर्गों के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि नई अयोध्या के निर्माण में हर समुदाय और नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है तथा आने वाली पीढ़ियां इस योगदान को याद रखेंगी।

     

    योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या की स्वच्छता और व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए सफाईकर्मियों को विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, लेकिन कार्यक्रम के बाद घाटों और सड़कों पर स्वच्छता बनाए रखना कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने नाविकों और माझियों की भी सराहना की, जो सरयू नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता में योगदान देते हैं।

     

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे अयोध्या को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और मर्यादित बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्य करा सकती है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और शहर की प्रतिष्ठा बनाए रखने की जिम्मेदारी नागरिकों की भी है। उन्होंने रामायण के पात्र मंथरा और मारीच का उदाहरण देते हुए कहा कि अयोध्या की गरिमा और गौरव पर किसी की कुदृष्टि नहीं पड़नी चाहिए।

     

    योगी आदित्यनाथ का यह बयान दीपोत्सव के बाद अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उनके संबोधन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, विकास और सामाजिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अयोध्या की नई पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और शहर अपनी धार्मिक तथा ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।

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