Last updated: February 1st, 2026 at 08:14 am
केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड के लिए ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो सीधे तौर पर पर्यटन, रोजगार और पलायन जैसी पुरानी चुनौतियों को संबोधित करते हैं। भले ही राज्य को कोई एक बड़ा मेगा प्रोजेक्ट न मिला हो, लेकिन सरकार के फैसलों से यह संकेत मिलता है कि पहाड़ी राज्यों के लिए लॉन्ग-टर्म और जमीनी असर वाली नीति अपनाई जा रही है।
पहाड़ों में इको-फ्रेंडली ट्रेल, पर्यटन से मिलेगा रोजगार
बजट में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल विकसित करने की घोषणा की गई है। सरकार का मानना है कि इससे ट्रैकिंग, हाइकिंग और नेचर-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से स्थानीय युवाओं के लिए टूरिस्ट गाइड, पोर्टर, टैक्सी चालक, होम-स्टे संचालक और छोटे व्यवसायों के रूप में रोजगार के अवसर बन सकते हैं। दूरस्थ गांवों में आय के साधन बढ़ने से पलायन पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
हर जिले में गर्ल्स होस्टल, शिक्षा तक बेहतर पहुंच
बजट में देश के हर जिले में गर्ल्स होस्टल खोलने का ऐलान किया गया है। इसका सीधा लाभ उत्तराखंड की छात्राओं को मिलेगा, खासकर उन जिलों में जहां उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंच बड़ी चुनौती रही है। इससे लड़कियों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलने की संभावना है।
पर्यटन सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट पर जोर
सरकार 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10 हजार टूरिस्ट गाइड को 12 हफ्तों की विशेष ट्रेनिंग देने की योजना लेकर आई है। अगर उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल इस योजना में शामिल होते हैं, तो राज्य के युवाओं को सीधे स्किल और रोजगार का मौका मिल सकता है। इसके साथ ही नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड के जरिए धार्मिक, सांस्कृतिक और विरासत स्थलों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन किया जाएगा। इससे रिसर्च, कंटेंट क्रिएशन और टेक्निकल फील्ड से जुड़े युवाओं के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
खादी, हैंडलूम और ODOP को मिलेगा सहारा
बजट में खादी, हैंडलूम, ऊनी उत्पाद और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों के लिए एकीकृत योजना का जिक्र किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक काम करने वाले कारीगरों को बेहतर ट्रेनिंग, गुणवत्ता सुधार और बाजार से सीधा जुड़ाव देना है। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत ब्रांडिंग और मार्केट लिंक मजबूत करने की बात कही गई है, जिससे ODOP उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
MSME और छोटे उद्योगों को राहत
केंद्रीय बजट में MSME सेक्टर के लिए फंड और पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने के प्रावधान किए गए हैं। इससे हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को राहत मिल सकती है। सरकार का फोकस है कि कारोबारियों का भुगतान समय पर हो, जिससे उत्पादन प्रभावित न हो और रोजगार बना रहे।
छोटे शहरों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश
बजट में छोटे और मझोले शहरों के विकास के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाया गया है। इसका असर देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों में सड़क, पानी, सीवर और आवास परियोजनाओं पर दिख सकता है। इन योजनाओं से निर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ने और शहरी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।
स्वास्थ्य और स्किलिंग से पहाड़ों को मजबूती
बजट 2026-27 में स्वास्थ्य और स्किल डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी गई है। अगले पांच वर्षों में बड़ी संख्या में हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे उत्तराखंड के युवाओं को नर्सिंग, टेक्नीशियन और केयर सेक्टर में अवसर मिल सकते हैं। जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सुविधाएं बढ़ने से पहाड़ी इलाकों में इलाज की पहुंच बेहतर होने की संभावना है।
प्री-बजट में उत्तराखंड की मांगें क्या थीं?
प्री-बजट बैठकों में राज्य सरकार ने पर्वतीय विकास, रिवर्स पलायन, क्लाइमेट रेजिलिएंस और आपदा प्रबंधन के लिए विशेष सहयोग की मांग रखी थी।
सरकार ने उत्तराखंड को देश का “वॉटर टावर” बताते हुए इको-सिस्टम सेवाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जरूरत पर जोर दिया था। इसके अलावा रेलवे कनेक्टिविटी, आपदा पुनर्निर्माण, कृषि सुरक्षा, सामाजिक पेंशन और कुंभ आयोजन के लिए अलग बजट की मांग भी केंद्र के सामने रखी गई थी।
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