Last updated: May 7th, 2026 at 07:14 am

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और बगावत की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को अपने कालीघाट स्थित आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों के साथ अहम बैठक की, लेकिन इस बैठक में 9 विधायक शामिल नहीं हुए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने पार्टी के भीतर तोड़फोड़ और गुटबाजी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों या नेतृत्व के खिलाफ किसी भी तरह की बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, ममता ने आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ लोगों ने अंदर से नुकसान पहुंचाया, जिसकी जांच कराई जाएगी।
इसी को लेकर पार्टी ने अनुशासन समिति का गठन किया है। इस समिति में डेरेक ओ’ब्रायन, फिरहाद हकीम, चंद्रिमा भट्टाचार्य और असीमा पात्रा को शामिल किया गया है। वहीं, चुनाव बाद हुई हिंसा और अशांति की जांच के लिए अलग-अलग फैक्ट फाइंडिंग टीम भी बनाई गई हैं।
बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन चुनाव में धांधली हुई है और TMC इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए गए, जिसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ा।
इस दौरान ममता ने विधायकों से विधानसभा के पहले दिन काले कपड़े पहनकर पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पद से हटाना है तो हटाया जाए, लेकिन वे अपना विरोध जारी रखेंगी।
बैठक में अभिषेक बनर्जी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। विधायकों ने अभिषेक के चुनाव प्रचार की सराहना करते हुए तालियां भी बजाईं। वहीं, कुछ विधायकों ने बैठक में अनुपस्थित रहने की वजह अपने क्षेत्रों में पोस्ट-पोल हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बताया।
ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में TMC कार्यालयों को निशाना बनाया गया और कई जगहों पर हिंसा फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने कार्यकर्ताओं से 9 मई को रवींद्र जयंती सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाने की अपील भी की।
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