Last updated: February 26th, 2026 at 05:13 pm

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने दावा किया कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत करीब 1.20 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी होनी है।
कोलकाता के भवानीपुर स्थित अपने निर्वाचन क्षेत्र में जैन मनस्तंभ और संत कुटिया गुरुद्वारा गेट सहित विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यह बयान दिया।
पहले चरण में 58 लाख नाम हटने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR प्रक्रिया के पहले चरण के बाद ही 58 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। इसके अलावा, 14 फरवरी तक “तार्किक विसंगतियों” का हवाला देकर करीब 20 लाख और वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात कही गई है। उन्होंने आशंका जताई कि कुल मिलाकर यह संख्या 1.20 करोड़ तक पहुंच सकती है।
चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर एक राजनीतिक दल के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तकनीकी या तार्किक खामियों के नाम पर वैध मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मैं एक भी वैध मतदाता का नाम हटाए जाने के खिलाफ आवाज उठाती रहूंगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।
व्हाट्सएप पर निर्देश जारी करने का भी आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग व्हाट्सएप के माध्यम से नए निर्देश जारी कर रहा है, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी ने बंगाल की सांस्कृतिक विविधता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी भाषाओं, धर्मों, परंपराओं और खान-पान का सम्मान किया जाता है। उन्होंने बिहार की रोटी, चपाती और लिट्टी से लेकर गुजरात के ढोकला जैसे व्यंजनों के प्रति अपनी पसंद का भी जिक्र किया।
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