Last updated: March 12th, 2026 at 12:16 pm

नई दिल्ली। भारत सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर ईरान के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हाल के दिनों में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि पिछली बातचीत के दौरान शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी। फिलहाल इस विषय पर इससे अधिक जानकारी देना जल्दबाजी होगी।
गल्फ देशों के नेताओं से भी प्रधानमंत्री की बातचीत
विदेश मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से भी फोन पर बातचीत की है। इन वार्ताओं में उन्होंने हालात को शांत करने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और किसी भी प्रकार की सिविलियन हताहतों से बचने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों में रहने वाली बड़ी भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया।
भारतीय नागरिकों की मदद जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि सरकार उन भारतीय नागरिकों की मदद कर रही है जो अज़रबैजान और आर्मेनिया के रास्ते स्वदेश लौटना चाहते हैं। ऐसे लोगों को वीजा उपलब्ध कराया जा रहा है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें जमीनी सीमाएं पार करने में भी सहायता दी जा रही है, ताकि वे वहां से वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए भारत लौट सकें।
पाकिस्तान के आरोपों को भारत ने किया खारिज
पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इन निराधार आरोपों को सिरे से खारिज करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए अपनी गलतियों का ठीकरा भारत पर फोड़ना अब आम बात हो गई है। उनके अनुसार, दशकों से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के रूप में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पहले ही सवालों के घेरे में है। सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी बातों का कोई आधार नहीं है और बार-बार कहानी बदलने से सच्चाई नहीं बदलती।
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