Last updated: March 14th, 2026 at 09:14 am

रांची: झारखंड में प्रदेश कांग्रेस संगठन को लेकर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में पार्टी की सक्रियता कम होती दिखाई दी है, जिसके कारण जनसरोकार के मुद्दों से दूरी बढ़ने की चर्चा भी हो रही है। बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों से राज्य स्तर पर कांग्रेस की ओर से कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ है, जिससे संगठन और जनता के बीच संवाद कमजोर पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी की गतिविधियाँ फिलहाल केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों तक सीमित होकर रह गई हैं। आखिरी बार जनवरी में केंद्र के निर्देश पर मनरेगा की सुरक्षा को लेकर राज्यभर में आंदोलन चलाया गया था। उस दौरान सभी जिलों और विधायकों को आंदोलन से संबंधित लक्ष्य भी दिए गए थे।
इस बीच संगठन के पुनर्गठन को लेकर भी चर्चा तेज है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष इस संबंध में प्रस्ताव लेकर नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय भी गए थे, हालांकि फिलहाल पुनर्गठन की प्रक्रिया को करीब 15 दिनों के लिए टाल दिया गया है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि झारखंड में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हो सकती है। इन राज्यों में अप्रैल तक चुनाव संपन्न होने की संभावना है, जिसके बाद झारखंड कांग्रेस में भी नए सिरे से संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इन संभावित बदलावों के पीछे मुख्य कारण पार्टी का कमजोर होता जनसंपर्क माना जा रहा है। हाल ही में हुए निकाय चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। अब तक प्रदेश नेतृत्व की ओर से हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा भी सामने नहीं आई है।
इसी बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हाल ही में रांची का दौरा कर लौट चुके हैं। फिलहाल झारखंड कांग्रेस के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता असम और पश्चिम बंगाल के चुनावी अभियान में सक्रिय रूप से लगाए गए हैं।
![]()
Comments are off for this post.