Last updated: March 22nd, 2026 at 10:28 am

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी रविवार शाम एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में ऊर्जा, बिजली और उर्वरक जैसे अहम क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य देशभर में आवश्यक संसाधनों की निर्बाध सप्लाई बनाए रखना है। सरकार खासतौर पर लॉजिस्टिक्स और वितरण प्रणाली को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, ताकि आम जनता और उद्योगों पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
वैश्विक ऊर्जा संकट की आहट
हाल ही में प्रधानमंत्री ने संकेत दिया था कि West Asia में जारी संघर्ष ने दुनिया को ऊर्जा संकट की ओर धकेल दिया है। उन्होंने इसे एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए धैर्य, जागरूकता और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं को दूर करने के उपाय तलाश रही है, ताकि देश में किसी प्रकार की कमी न हो।
खाड़ी देशों से लगातार संपर्क में भारत
संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री ने कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे खाड़ी देश शामिल हैं, साथ ही इजरायल, ईरान, फ्रांस और मलेशिया से भी संवाद जारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण
तनाव के बीच Strait of Hormuz पर भी असर देखने को मिल रहा है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक ऊर्जा सप्लाई होती है। मौजूदा हालात में जहाजों की आवाजाही काफी सीमित कर दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
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