Last updated: April 21st, 2026 at 07:58 am

Bihar Politics: महिला आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने इस विषय पर तीखी और विवादित टिप्पणी करते हुए राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राजनीति में महिलाओं के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं और यौन शोषण जैसे मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा करने की जरूरत है। उनके कुछ बयानों को लेकर व्यापक विवाद भी खड़ा हो गया है।
विवादित टिप्पणी से मचा हंगामा
अपने बयान में उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है और इस क्षेत्र में शोषण के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान को लेकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई है, जबकि कुछ लोग इसे एक गंभीर मुद्दे को उठाने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।
केंद्र सरकार और बिल पर सवाल
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी पप्पू यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक चर्चा, विशेषज्ञों की राय और राज्यों से परामर्श जरूरी था। उनका मानना है कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले सामाजिक और जातीय आधार पर व्यापक आंकलन भी किया जाना चाहिए।
अन्य नेताओं पर भी साधा निशाना
पप्पू यादव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर भी तीखी टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। इसके अलावा उन्होंने बीजेपी के अंदरूनी हालात और नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए।
सम्राट चौधरी को लेकर अलग रुख
हालांकि बिहार में नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर पप्पू यादव का रुख थोड़ा अलग नजर आया। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग से आने वाले नेता का मुख्यमंत्री बनना सकारात्मक कदम है, लेकिन पार्टी के भीतर उन्हें पूरी तरह स्वीकार किए जाने को लेकर सवाल भी उठाए।
सियासी असर क्या होगा?
पप्पू यादव के इस बयान के बाद महिला आरक्षण और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं, जिससे बिहार समेत राष्ट्रीय राजनीति में बहस का नया दौर शुरू होने की संभावना है।
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