Last updated: April 25th, 2026 at 05:12 am

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक अहम बदलाव देखने को मिला है, जहां लंबे समय बाद किसी विधायक ने मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। सम्राट चौधरी ने यह कदम उठाते हुए राज्य की राजनीतिक परंपरा में नया अध्याय जोड़ दिया है।
पिछले कई वर्षों से बिहार में मुख्यमंत्री पद पर ऐसे नेता रहे, जो विधान परिषद के सदस्य के रूप में कार्यरत थे। इस क्रम में सबसे लंबा कार्यकाल पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रहा, जिन्होंने कई बार विधान परिषद सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
इतिहास पर नजर डालें तो 2005 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के समय नीतीश कुमार लोकसभा सदस्य थे, जिसके बाद वे 2006 में विधान परिषद के सदस्य बने और लंबे समय तक उसी रूप में पद संभाला। हालांकि 2014 में कुछ समय के लिए जीतनराम मांझी मुख्यमंत्री बने, जो उस वक्त विधायक थे।
दरअसल, बिहार में विधायक की जगह विधान परिषद सदस्य के मुख्यमंत्री बनने की परंपरा 1968 में शुरू हुई थी, जब वी.पी. मंडल मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद कई नेताओं ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाया।
अब सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने और स्वयं विधायक रहते हुए विश्वास मत पेश करने से यह सिलसिला बदलता नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
इस घटनाक्रम ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया है, बल्कि इसे बिहार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में भी देखा जा रहा है।
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