Last updated: April 28th, 2026 at 07:21 am

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं खुलकर सामने आने लगी हैं। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मई के पहले सप्ताह में अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं।
यह विस्तार केवल औपचारिक नहीं होगा, बल्कि इसमें सियासी समीकरणों का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर मंत्री पद को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है। जहां एक तरफ मौजूदा मंत्री अपने पद को बनाए रखने की कोशिश में हैं, वहीं दूसरी ओर नए और युवा विधायक भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और जदयू दोनों ही दल संतुलन बनाते हुए कैबिनेट का विस्तार करना चाहते हैं। भाजपा जहां अपने प्रमुख चेहरों को बरकरार रखते हुए कुछ नए नेताओं को मौका देने पर विचार कर रही है, वहीं जदयू में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन विभागों में फेरबदल लगभग तय है।
जदयू कोटे से कुछ नए चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है, जबकि पहले से खाली पड़े कुछ पदों को इस बार भरा जा सकता है। इसके अलावा सहयोगी दलों में भी हलचल बनी हुई है और वे भी कैबिनेट में हिस्सेदारी को लेकर सक्रिय हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ युवा नेतृत्व को आगे लाने की कोशिश भी इसमें देखने को मिलेगी।
कुल मिलाकर, बिहार की सियासत एक बार फिर अहम मोड़ पर है, जहां हर फैसला भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नई कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन्हें इंतजार करना पड़ता है।
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