Last updated: May 5th, 2026 at 04:04 pm

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उनके इस रुख ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और संवैधानिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम वास्तविक जनादेश को नहीं दर्शाते और नैतिक रूप से उनकी पार्टी ही विजेता है। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और उनकी लड़ाई राजनीतिक दलों से ज्यादा चुनावी व्यवस्था से रही।
संवैधानिक जानकारों का मानना है कि ऐसी स्थिति में राज्यपाल की भूमिका अहम हो जाती है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मुख्यमंत्री बहुमत खो देता है या चुनाव में हार जाता है, तो उसे पद छोड़ना होता है। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो राज्यपाल आवश्यक कदम उठा सकते हैं और नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उन्हें विभिन्न विपक्षी नेताओं का समर्थन मिल रहा है और वे आगे चलकर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान देंगी। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में कई बड़े नेता कोलकाता पहुंच सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम राज्य में संवैधानिक टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है, जहां राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस असामान्य स्थिति में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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