Last updated: May 18th, 2026 at 01:10 pm

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। चुनावी तैयारियों के बीच अब सबसे ज्यादा चर्चा सीट शेयरिंग और गठबंधन की रणनीति को लेकर हो रही है। पटना से लेकर दिल्ली तक लगातार बैठकों का दौर जारी है और राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में लगे हुए हैं।
एनडीए और INDIA गठबंधन दोनों तरफ अंदरूनी बातचीत तेज हो गई है। कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, किस क्षेत्र में किसका प्रभाव ज्यादा है और किन चेहरों पर दांव लगाया जाएगा — इन मुद्दों पर लगातार चर्चा चल रही है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कई सीटों पर सहयोगी दलों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा। कुछ नेताओं की तरफ से अंदरखाने नाराजगी की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि सार्वजनिक तौर पर सभी दल एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी की तरफ से लगातार संगठन को मजबूत करने पर फोकस किया जा रहा है। पार्टी नेताओं की बैठकों में बूथ स्तर की तैयारी और क्षेत्रीय समीकरणों पर चर्चा हो रही है। दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन भी संयुक्त रणनीति बनाने में जुटा हुआ है।
राजद और जेडीयू के नेताओं की हालिया मुलाकातों के बाद राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग अनुमान लगा रहे हैं। कुछ सीटों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है जहां कई बड़े नेता दावेदारी कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में सीट शेयरिंग सिर्फ गणित का मामला नहीं होता, बल्कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। यही वजह है कि हर चुनाव से पहले बातचीत लंबी खिंचती दिखाई देती है।
इस बार युवा वोटर्स और पहली बार मतदान करने वाले लोगों को लेकर भी सभी दल खास रणनीति बना रहे हैं। सोशल मीडिया कैंपेन पर भी ज्यादा फोकस बढ़ गया है। छोटे वीडियो, लोकल भाषाओं में पोस्ट और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर लगातार डिजिटल प्रचार किया जा रहा है।
इसी बीच कुछ नेताओं के बयान भी चर्चा में आ गए हैं। एक तरफ सत्ता पक्ष विकास और कानून व्यवस्था को मुद्दा बना रहा है, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और सरकारी भर्तियों को लेकर सरकार पर हमला कर रहा है।
बिहार में राजनीतिक माहौल ऐसा बन चुका है जहां हर छोटे बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। टीवी डिबेट से लेकर सोशल मीडिया तक लगातार बहस चल रही है। कई पुराने नेता भी अचानक सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक गतिविधियों के बीच जनता की नजर अब उम्मीदवारों और गठबंधन के अंतिम फैसलों पर टिकी हुई है। खासकर उन सीटों पर ज्यादा चर्चा है जहां पिछले चुनाव में मुकाबला बेहद करीबी रहा था।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में कई बड़ी राजनीतिक बैठकें हो सकती हैं। कुछ दलों के बीच अंदरूनी बातचीत अभी भी जारी है और अंतिम फैसला होने तक कई समीकरण बदल सकते हैं।
फिलहाल बिहार की राजनीति में सीट शेयरिंग सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। नेता लगातार बयान दे रहे हैं, समर्थक सोशल मीडिया पर अपनी-अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में लगे हैं और राजनीतिक गलियारों में हर दिन नए दावे सुनने को मिल रहे हैं।
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