Last updated: May 19th, 2026 at 09:14 am

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर नया विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने विधानसभा सचिवालय के खिलाफ सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन दाखिल किया है। उनका आरोप है कि आवश्यक समर्थन होने के बावजूद उन्हें अब तक विपक्ष के नेता के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है।
TMC ने लगाया देरी का आरोप
TMC का कहना है कि विधानसभा गठन और शपथ प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी ने औपचारिक रूप से शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता घोषित किया था। पार्टी ने दावा किया कि इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भी भेजा गया था।
सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में यह पत्र विधानसभा सचिवालय को सौंपा गया था, लेकिन कई दिन गुजरने के बाद भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई।
सचिवालय ने मांगे अतिरिक्त दस्तावेज
विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से बताया गया कि सचिवालय ने तृणमूल विधायक दल से उस प्रस्ताव की प्रति मांगी है, जिसमें विधायकों के हस्ताक्षर के साथ शोभनदेव को नेता चुनने की पुष्टि हो।
गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा पाने के लिए न्यूनतम विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। तृणमूल का दावा है कि उनके पास आवश्यक संख्या से कहीं अधिक विधायकों का समर्थन मौजूद है।
RTI के जरिए मांगी पुरानी प्रक्रिया की जानकारी
पूर्व संसदीय कार्य मंत्री रहे शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार जानबूझकर देरी की जा रही है।
उन्होंने RTI आवेदन में यह जानकारी मांगी है कि 2011, 2016 और 2021 में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति के दौरान विधानसभा सचिवालय ने कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई थीं।
बंद मिला कार्यालय, लॉबी में बैठकर किया काम
सूत्रों के मुताबिक सोमवार को जब शोभनदेव विधानसभा पहुंचे तो नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित कार्यालय बंद मिला। इसके बाद उन्हें कुछ समय तक विधानसभा की लॉबी में बैठकर काम करना पड़ा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर विधानसभा की कार्यप्रणाली और राजनीतिक प्रक्रियाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
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