Last updated: May 19th, 2026 at 01:07 pm

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है, लेकिन सरकार जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है।
पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल के दामों में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। परिवहन खर्च बढ़ने से सब्जियों, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। ऐसे में विपक्ष ने इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता के बावजूद देश में जनता को राहत नहीं मिल रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार टैक्स के जरिए भारी कमाई कर रही है, जबकि आम लोग महंगाई से जूझ रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग, मजदूर और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि चुनावों के दौरान महंगाई कम करने के वादे किए गए थे, लेकिन अब हालात पहले से ज्यादा खराब होते जा रहे हैं।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक ड्रामा बताया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के कारण ईंधन की कीमतों पर असर पड़ता है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार गरीबों और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए कई योजनाएं चला रही है।
बीजेपी प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक फायदा उठाने के लिए महंगाई का मुद्दा उछाल रहा है। सरकार समर्थकों का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए कई कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई का मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा प्रभाव डाल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी होती हैं, इसलिए इस पर राजनीतिक बहस हमेशा तेज रहती है। विपक्ष इसी मुद्दे के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव कृषि, व्यापार, उद्योग और घरेलू बजट तक दिखाई देता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से बाजार में लगभग हर चीज की कीमत बढ़ने लगती है। यही कारण है कि महंगाई का मुद्दा तेजी से राजनीतिक रूप ले लेता है।
देश के कई हिस्सों में ट्रांसपोर्ट यूनियनों और ऑटो चालकों ने भी बढ़ती कीमतों को लेकर नाराजगी जाहिर की है। दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में किराया बढ़ाने की मांग उठ रही है। कुछ संगठनों ने विरोध प्रदर्शन और हड़ताल की चेतावनी भी दी है।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है। विपक्षी दल सरकार को घेरने के लिए पुराने बयानों और चुनावी वादों का हवाला दे रहे हैं। वहीं बीजेपी समर्थक वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संकटों को कीमतों में बढ़ोतरी की वजह बता रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि महंगाई और ईंधन की कीमतें हमेशा जनता की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा रही हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में यह विषय संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है। फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर सियासत लगातार तेज होती दिखाई दे रही है।
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