Last updated: May 25th, 2026 at 01:53 pm

उत्तर प्रदेश में बकरीद से पहले मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सरकार ने कानून व्यवस्था और धार्मिक आयोजनों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने साफ कहा है कि सार्वजनिक सड़कों और खुले स्थानों पर नमाज की अनुमति नहीं होगी और कुर्बानी केवल निर्धारित स्थानों पर ही की जा सकेगी। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाए। साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि धार्मिक गतिविधियां परंपरागत स्थानों पर ही आयोजित की जाएं। सार्वजनिक सड़कों, पार्कों और अन्य खुले सरकारी स्थानों पर नमाज या धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।
इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का कहना है कि प्रशासन को सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और त्योहारों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि भाजपा नेताओं ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है। भाजपा का कहना है कि यह कदम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों को असुविधा से बचाने के लिए उठाया गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार सभी धर्मों के त्योहारों के लिए समान नियम लागू कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक मुद्दे हमेशा राजनीति के केंद्र में रहे हैं। ऐसे फैसले भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करने में मदद करते हैं, जबकि विपक्ष इन्हें अल्पसंख्यक राजनीति से जोड़कर जनता के बीच मुद्दा बनाने की कोशिश करता है।
इस बीच प्रशासन ने जिलों में पुलिस और स्थानीय अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की तैयारी भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों की राजनीतिक अहमियत और बढ़ सकती है। भाजपा जहां कानून व्यवस्था और धार्मिक अनुशासन को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति बता रहा है।
फिलहाल बकरीद को लेकर जारी निर्देशों ने राज्य की राजनीति को गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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