Last updated: May 25th, 2026 at 02:17 pm

चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीखों की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को मतदान कराया जाएगा। चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार चयन और रणनीति को लेकर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।
राज्यसभा चुनाव को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संसद के उच्च सदन में संख्या बल बढ़ाने के लिए सभी प्रमुख दल पूरी ताकत लगा रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और कई क्षेत्रीय पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने के लिए रणनीति तैयार कर रही हैं।
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार नामांकन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और निर्धारित तारीख तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों का असर आने वाले संसद सत्र और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। राज्यसभा में संख्या बल कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि सभी दल इन चुनावों को गंभीरता से ले रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी इस समय कई राज्यों में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि राज्यसभा में भी उसका प्रभाव और बढ़े। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यों में मिले जनसमर्थन का असर राज्यसभा चुनाव में भी दिखाई देगा।
दूसरी तरफ कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा को चुनौती देने के लिए संयुक्त रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच समन्वय की चर्चा भी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कुछ सीटों पर मुकाबला काफी रोचक हो सकता है।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की सीटों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी। इन राज्यों में राजनीतिक समीकरण अलग-अलग हैं और कई जगहों पर क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर भी चर्चा हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का खेल नहीं होता, बल्कि यह राजनीतिक ताकत और गठबंधन क्षमता की भी परीक्षा माना जाता है। कई बार छोटे दल और निर्दलीय विधायक भी चुनाव परिणामों में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस बीच राजनीतिक दलों ने अपने विधायकों के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मतदान के दौरान कोई रणनीतिक गलती न हो। कुछ दलों ने अपने विधायकों के लिए विशेष निर्देश भी जारी किए हैं।
फिलहाल राज्यसभा चुनाव 2026 की घोषणा के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम, गठबंधन समीकरण और राजनीतिक रणनीतियां राष्ट्रीय चर्चा का बड़ा विषय बनने वाली हैं।
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