Last updated: June 6th, 2026 at 08:49 am

पटना। बिहार विधान परिषद की 9 सीटों और एक उपचुनाव को लेकर एनडीए द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। इस सूची के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर हो रही है, जिनका नाम उम्मीदवारों में शामिल नहीं किया गया है।
दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन वे न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किसी भी मंत्री को पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता प्राप्त करना आवश्यक होता है। ऐसे में उनके लिए MLC चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
हाल ही में घोषित एनडीए उम्मीदवार सूची में भाजपा ने अपने कोटे से चार नामों की घोषणा की है, जबकि जदयू ने भी अपने हिस्से के उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। इसके बाद यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि दीपक प्रकाश को इस बार विधान परिषद में जगह नहीं मिल पाई है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, एनडीए ने इस बार अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है। गठबंधन के भीतर सीटों के संतुलन के कारण कुछ सहयोगी दलों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
दीपक प्रकाश, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं और लंबे समय से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर एमएलसी सीट की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन अंतिम सूची में नाम शामिल नहीं होने से उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एनडीए नेतृत्व उनके लिए कोई वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था करेगा या फिर संवैधानिक बाध्यता के कारण उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। 18 जून को होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले यह मामला बिहार की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
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