Last updated: June 6th, 2026 at 08:52 am

पटना। बिहार की राजनीति में सरकारी सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने आवास पर तैनात सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने का फैसला लिया है। इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है और राजद ने सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व के साथ सरकार का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी सुरक्षा और आवास से जुड़े मामलों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिसे राजद स्वीकार नहीं करेगी।
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि राबड़ी देवी का फैसला केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि इसे पार्टी के व्यापक रुख के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में राजद के विधायक और विधान पार्षद भी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस करने का निर्णय ले सकते हैं।
राजद का कहना है कि पार्टी नेताओं को जनता का समर्थन और भरोसा प्राप्त है, इसलिए उन्हें राजनीतिक रूप से सुरक्षित महसूस करने के लिए सरकारी सुरक्षा पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
प्रवक्ता ने कहा कि पिछले चुनावों में बड़ी संख्या में लोगों ने राजद के पक्ष में समर्थन जताया था और यही जनसमर्थन पार्टी की ताकत है। उन्होंने राबड़ी देवी के कदम को स्वाभिमान और राजनीतिक संदेश से जुड़ा फैसला बताया।
इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में एक नया मुद्दा उभर आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजद के अन्य जनप्रतिनिधि भी सुरक्षा लौटाने का फैसला करते हैं, तो यह राज्य की राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा सकता है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना रह सकता है।
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