Last updated: June 9th, 2026 at 04:17 pm

भारत इस वर्ष BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ BRICS समूह अब कई नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद और अधिक प्रभावशाली मंच बन चुका है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता को वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाल ही में चीन के राजदूत ने भी भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों देश संगठन के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। इस बयान को BRICS के भीतर बढ़ते सहयोग और बहुपक्षीय संवाद के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत की अध्यक्षता के दौरान संगठन कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर नई पहल कर सकता है।
BRICS को दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच माना जाता है। सदस्य देशों की आबादी, आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रभाव को देखते हुए यह समूह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पिछले कुछ वर्षों में संगठन ने व्यापार, निवेश, विकास वित्त और वैश्विक शासन से जुड़े विषयों पर सक्रिय भागीदारी दिखाई है।
भारत लंबे समय से विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत करने की बात करता रहा है। BRICS की अध्यक्षता के दौरान भी भारत का फोकस समावेशी विकास, वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
भारत सरकार का कहना है कि BRICS केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है, बल्कि यह विभिन्न देशों के बीच संवाद और साझेदारी को भी मजबूत करता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी सहयोग जैसे विषय संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। भारत इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में BRICS का महत्व और बढ़ गया है। वैश्विक व्यापार, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कई विकासशील देश ऐसे मंचों की ओर देख रहे हैं जो बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दें। भारत की अध्यक्षता ऐसे समय में हो रही है जब विश्व व्यवस्था में कई बड़े परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।
BRICS के विस्तार के बाद संगठन का प्रभाव भी बढ़ा है। नए सदस्य देशों के शामिल होने से इसकी आर्थिक और राजनीतिक पहुंच व्यापक हुई है। भारत के सामने अब चुनौती यह होगी कि वह विभिन्न सदस्य देशों की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाते हुए संगठन को प्रभावी दिशा प्रदान करे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BRICS अध्यक्षता भारत की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। इससे भारत को वैश्विक नेतृत्व की अपनी छवि को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को और प्रभावशाली बनाने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के नए अवसर भी सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत यदि विकासशील देशों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने लाने में सफल रहता है, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और मजबूती मिल सकती है। वैश्विक दक्षिण के कई देश भारत को अपनी चिंताओं और अपेक्षाओं की आवाज के रूप में देखते हैं।
फिलहाल BRICS 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत की गतिविधियों और पहलों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले महीनों में संगठन की बैठकों, घोषणाओं और सहयोग कार्यक्रमों के माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि भारत इस मंच को किस दिशा में आगे बढ़ाता है और वैश्विक सहयोग को नई ऊर्जा देने में कितनी सफलता प्राप्त करता है।
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